देश में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जारी नई NFHS-6 (National Family Health Survey-6) रिपोर्ट ने एक बार फिर गंभीर चिंताओं को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों के पोषण स्तर और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की गति धीमी बनी हुई है, जबकि कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं अब भी बड़ी चुनौती के रूप में सामने हैं।
बच्चों में कुपोषण की स्थिति
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के कई राज्यों में बच्चों में कुपोषण की समस्या अब भी बनी हुई है। कम वजन (Underweight), लंबाई के अनुपात में कमी (Stunting) और कमजोर शारीरिक विकास जैसे संकेतकों में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी, गरीबी और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच है।
एनीमिया बना बड़ी चुनौती
NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार, बच्चों और महिलाओं में एनीमिया की समस्या अभी भी व्यापक स्तर पर मौजूद है। आयरन की कमी के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे वे बार-बार बीमार पड़ते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बताया है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अंतर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य संकेतकों में अंतर अब भी बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण और एनीमिया के मामले अधिक पाए गए हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती।
सरकार के प्रयास और चुनौतियां
सरकार द्वारा पोषण सुधार के लिए कई योजनाएं जैसे मिड-डे मील योजना, आंगनवाड़ी सेवाएं और पोषण अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर अभी और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा जब उन्हें सही तरीके से लागू किया जाए और अंतिम लाभार्थी तक उनका लाभ पहुंचे।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में पोषण सुधार के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि परिवारों की जागरूकता भी जरूरी है। संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष
NFHS-6 रिपोर्ट ने देश के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक बार फिर गंभीर तस्वीर पेश की है। हालांकि कुछ संकेतकों में सुधार देखने को मिला है, लेकिन कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याएं अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है कि बच्चों के स्वास्थ्य पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।








