कर्नाटक के मांड्या जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जिंदगीभर सड़कों और मस्जिद के बाहर भीख मांगकर अपना गुजारा करने वाली एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उसके घर से 8.4 लाख रुपये का ‘खजाना’ निकल आया। 30 से ज्यादा बोरियों में भरे नोट और सिक्के देखकर पड़ोसी, रिश्तेदार और स्थानीय लोग हैरान रह गए। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि जो महिला रोज भीख मांगती दिखती थी, उसने चुपके से इतनी बड़ी रकम जमा कर ली होगी।
कौन थीं यह महिला?
महिला का नाम हूर उन्निसा (कुछ जगहों पर नूर या नूरउन्निसा भी बताया गया) है। वह करीब 68 से 70 साल की थीं और मांड्या शहर के गुथालू (गुट्टालू) लेआउट में किराए के एक छोटे से मकान में रहती थीं। पहले वह अपनी बहन के साथ रहती थीं। दोनों बहनें अविवाहित थीं और सालों से एक-दूसरे का सहारा थीं। करीब दो साल पहले बहन की मौत हो गई, जिसके बाद हूर पूरी तरह अकेली हो गईं।
हूर लंबे समय से शहर की सड़कों, ट्रैफिक सिग्नल और इलाके की मस्जिद के बाहर बैठकर भीख मांगती थीं। लोग उन्हें एक गरीब, असहाय और बुजुर्ग महिला के रूप में जानते थे। वे अक्सर कहती थीं, “बेटा, मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं है… इसलिए मुझे भीख मांगनी पड़ती है।” कई लोग उन्हें पैसे या सिक्के देकर चले जाते थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वे उन सिक्कों और छोटे नोटों को जमा करती जा रही हैं।
कैसे खुला राज?
रविवार, 23 अगस्त 2026 को हूर की उम्र संबंधी बीमारी के कारण मौत हो गई। जब पड़ोसियों ने दो-तीन दिनों तक उन्हें बाहर नहीं देखा, तो उन्होंने चिंता जताई। दरवाजा खोलने पर वे मृत पाई गईं। अंतिम संस्कार की व्यवस्था करते समय स्थानीय लोगों और मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने घर की तलाशी ली। तभी कमरे में 30 से ज्यादा बोरियां नजर आईं।
इन बोरियों को खोलते ही सबकी सांसें रुक गईं। अंदर 10 रुपये, 20 रुपये और 50 रुपये के नोट तथा हजारों सिक्के भरे हुए थे। कुछ बोरियां इतनी भारी थीं कि उन्हें उठाना भी मुश्किल हो रहा था। गिनती शुरू हुई तो घंटों लग गए। आखिरकार कुल रकम 8.4 लाख रुपये निकली। कुछ शुरुआती अफवाहों में यह रकम 30 लाख या उससे ज्यादा बताई जा रही थी, लेकिन मस्जिद कमेटी और परिवार की मौजूदगी में हुई आधिकारिक गिनती में कुल बचत 8.4 लाख रुपये ही सामने आई।
पैसे किसे सौंपे गए?
गिनती पूरी होने के बाद पूरी रकम हूर के दो भाइयों को सौंप दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार एक भाई को करीब 6 लाख रुपये मिले, जबकि दूसरे भाई ने अपने हिस्से के 2.4 लाख रुपये मस्जिद को दान कर दिए। मस्जिद कमेटी ने पैसे सुरक्षित रखे और परिवार को सौंपने से पहले पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की।
पुलिस ने मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया, क्योंकि महिला की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई थी। कोई संदेह या गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली।
लोगों की प्रतिक्रिया
पड़ोसियों का कहना है कि हूर कभी किसी को अपने घर के अंदर नहीं आने देती थीं। वे बहुत सतर्क रहती थीं और पैसे छुपाकर रखती थीं। परिवार के सदस्यों ने भी दावा किया कि उन्हें इस बचत की जरा भी जानकारी नहीं थी। कुछ लोगों का कहना है कि महिला को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी थीं और वे बोलने-सुनने में कमजोर थीं।
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो गया। लोग हैरान हैं कि भीख मांगकर इतनी बड़ी रकम कैसे जमा की जा सकती है। कई लोग इसे मेहनत और बचत का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या वाकई सिर्फ भीख से इतना पैसा जमा होना संभव है।
एक सोचने वाली बात
यह कहानी सिर्फ पैसे की नहीं है। यह उस जिंदगी की है जिसमें एक महिला ने सालों तक सड़क पर बैठकर अपना गुजारा किया, लेकिन मरने के बाद उसके पास इतना पैसा निकला कि पूरा इलाका दंग रह गया। पैसा तो मिल गया, लेकिन अब वह उनके किसी काम का नहीं रहा।
मांड्या की हूर उन्निसा की यह कहानी याद दिलाती है कि दिखने और असलियत में कितना बड़ा फर्क हो सकता है। जिंदगीभर भीख मांगने वाली महिला का 30 बोरियों में छिपा ‘खजाना’ अब चर्चा का विषय बना हुआ है।








