कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट आज 49 साल के हो गए। 7 सितंबर 1977 को जन्मे पायलट का इस बार जन्मदिन इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ ही दिन पहले कांग्रेस ने उन्हें पंजाब का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है।
राजनीति के साथ सचिन पायलट का टेरिटोरियल आर्मी से भी खास जुड़ाव रहा है। साल 2012 में वह प्रादेशिक सेना में शामिल हुए थे और 124 सिख बटालियन से जुड़े। बाद में उन्हें कैप्टन के पद पर प्रमोशन मिला। 2021 में वह 124 सिख रेजिमेंट की जनरल मीटिंग और ड्रिल में भी शामिल हुए थे।
सेना से जुड़ाव को बताया खास सम्मान
अपने 49वें जन्मदिन के मौके पर पायलट ने टेरिटोरियल आर्मी और सिख रेजिमेंट से अपने जुड़ाव को याद किया। उनके लिए सेना से जुड़ना केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सम्मान और गर्व का विषय रहा है।
पायलट का यह सैन्य जुड़ाव उनके राजनीतिक जीवन से अलग एक महत्वपूर्ण पहचान भी रहा है। वह उन चुनिंदा राजनेताओं में हैं, जिन्होंने राजनीति के साथ प्रादेशिक सेना में भी सेवा की है।
26 साल की उम्र में बने थे सांसद
सचिन पायलट ने बेहद कम उम्र में राजनीति में बड़ी पहचान बनाई। 2004 में उन्होंने दौसा लोकसभा सीट से चुनाव जीता और महज 26 वर्ष की उम्र में सांसद बने। इसके बाद 2009 में अजमेर से लोकसभा चुनाव जीता और केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद राजस्थान की राजनीति में भी उनका कद लगातार बढ़ता गया। वह राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे और 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद राजस्थान के उपमुख्यमंत्री बने।
अब पंजाब कांग्रेस की बड़ी जिम्मेदारी
5 सितंबर 2026 को कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया। उन्होंने भूपेश बघेल की जगह ली है।
पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पायलट के सामने संगठन को मजबूत करने, पार्टी नेताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने और चुनावी तैयारियों को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी है।
जन्मदिन के साथ नई राजनीतिक चुनौती
49वें जन्मदिन पर सचिन पायलट के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का नया दौर शुरू हुआ है। राजस्थान से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाने वाले पायलट अब पंजाब में कांग्रेस संगठन की कमान संभाल रहे हैं।
ऐसे में उनका जन्मदिन सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि का अवसर नहीं, बल्कि कांग्रेस में मिली नई जिम्मेदारी के बीच आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी अहम माना जा रहा है।








