पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच 100 फीसदी इथेनॉल से चलने वाली कार को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान सामने आया है। गडकरी ने दावा किया है कि ऐसी कार को चलाने की लागत करीब 25 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि अक्टूबर में 100% इथेनॉल पर चलने वाली टोयोटा इनोवा लॉन्च होने की उम्मीद है।
पेट्रोल की जगह 100% इथेनॉल
गडकरी के मुताबिक प्रस्तावित कार को चलाने के लिए पेट्रोल की जरूरत नहीं होगी। यह 100% इथेनॉल/फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम करेगी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर में टोयोटा की ऐसी इनोवा के लॉन्च कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया गया है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। ₹25 प्रति लीटर का आंकड़ा सीधे इथेनॉल की पंप कीमत नहीं है, बल्कि गडकरी द्वारा बताई गई पेट्रोल के मुकाबले प्रभावी रनिंग-कॉस्ट की तुलना है। इसलिए इसे यह समझना सही नहीं होगा कि बाजार में इथेनॉल अभी सीधे ₹25 प्रति लीटर बिक रहा है।
आखिर ₹25 का हिसाब कैसे?
इस गणना के पीछे इथेनॉल और हाइब्रिड तकनीक का संयोजन बताया जा रहा है। इथेनॉल को गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है। वहीं मजबूत हाइब्रिड सिस्टम जरूरत के हिसाब से पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर के बीच काम करता है। इससे ईंधन की खपत कम करने में मदद मिल सकती है।
गडकरी ने इससे पहले भी एक 100% इथेनॉल वाहन के बारे में बताते हुए कहा था कि गाड़ी चलते समय बिजली भी पैदा कर सकती है और इसी आधार पर उन्होंने इसकी प्रभावी लागत करीब ₹25 प्रति लीटर बताई थी।
अक्टूबर में लॉन्च होने की बात
गडकरी के ताजा बयान के मुताबिक, 100% इथेनॉल से चलने वाली टोयोटा इनोवा अक्टूबर में लॉन्च हो सकती है। हालांकि, टोयोटा की भारत वेबसाइट पर इस समय इस लॉन्च की अलग से आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए लॉन्च की तारीख को फिलहाल मंत्री के बयान के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
क्या हर कार में इस्तेमाल कर सकेंगे इथेनॉल?
नहीं। सामान्य पेट्रोल कार में मनमाने तरीके से 100% इथेनॉल डालना सही नहीं होगा। 100% इथेनॉल के लिए वाहन का इंजन और फ्यूल सिस्टम उसके अनुकूल होना जरूरी है।
मौजूदा E20 पेट्रोल इससे अलग है। E20 में पेट्रोल के साथ अधिकतम 20% तक इथेनॉल मिलाया जाता है, जबकि 100% इथेनॉल वाहन को विशेष रूप से इस ईंधन के लिए तैयार किया जाता है। भारत में E20 को लेकर माइलेज और पुराने वाहनों पर असर जैसी बहस भी जारी है।
किसानों के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है इथेनॉल?
इथेनॉल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र से जुड़े कच्चे माल से आता है। गडकरी लंबे समय से इथेनॉल को बढ़ावा देने को किसानों की आय और भारत की ऊर्जा जरूरतों से जोड़ते रहे हैं। उनका तर्क है कि देश में उत्पादित कृषि उपज से ईंधन तैयार होने पर आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
क्या सच में पेट्रोल का खर्च ₹25 प्रति लीटर हो जाएगा?
इसे सीधी पेट्रोल कीमत के तौर पर नहीं समझना चाहिए। ₹25 का आंकड़ा प्रभावी रनिंग कॉस्ट की तुलना है। वास्तविक खर्च वाहन की कीमत, इथेनॉल की उपलब्ध कीमत, माइलेज, हाइब्रिड सिस्टम की कार्यक्षमता और इस्तेमाल की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
यानी फिलहाल यह कहना ज्यादा सटीक है कि 100% इथेनॉल और हाइब्रिड तकनीक वाली कार के लिए ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर रनिंग-कॉस्ट का दावा किया गया है, न कि बाजार में पेट्रोल ₹25 लीटर होने वाला है।
भारत में वैकल्पिक ईंधन की दिशा में बड़ा कदम
अगर 100% इथेनॉल से चलने वाली कारें बड़े स्तर पर आती हैं, तो भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त इथेनॉल उत्पादन, फ्यूल पंप नेटवर्क, वाहन तकनीक और उपभोक्ताओं के लिए स्पष्ट लागत गणना भी जरूरी होगी।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि पेट्रोल के विकल्प के रूप में 100% इथेनॉल तकनीक को लेकर एक नई पहल सामने आई है और अक्टूबर में प्रस्तावित टोयोटा इनोवा लॉन्च के बाद इसके व्यावहारिक खर्च और प्रदर्शन की तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है।








