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July 22, 2026 10:53 am

बारिश में बढ़ता रैट फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के जरूरी उपाय

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मानसून के मौसम में जहां बारिश गर्मी से राहत देती है, वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इन्हीं में से एक है रैट फीवर (Leptospirosis)। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान जलभराव, गंदा पानी और संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से इस बीमारी के फैलने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है।

रैट फीवर एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो Leptospira नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से चूहों और कुछ अन्य जानवरों के मूत्र के माध्यम से पानी और मिट्टी में फैलता है। जब कोई व्यक्ति संक्रमित पानी या कीचड़ के संपर्क में आता है, खासकर यदि उसके शरीर पर कोई कट, खरोंच या घाव हो, तो बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है। आंख, नाक या मुंह की श्लेष्मा झिल्ली (mucous membranes) के जरिए भी संक्रमण फैल सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि रैट फीवर के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, कमजोरी, आंखों का लाल होना, मतली, उल्टी और दस्त शामिल हैं। कुछ गंभीर मामलों में संक्रमण लिवर, किडनी, फेफड़ों या मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। यदि पीलिया, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब कम आना या लगातार तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम में कुछ लोग इस संक्रमण की चपेट में आने के अधिक जोखिम में होते हैं। इनमें सफाईकर्मी, सीवर और नाले में काम करने वाले कर्मचारी, किसान, पशुपालक, राहत एवं बचाव कार्य में लगे लोग और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक शामिल हैं। ऐसे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

रैट फीवर से बचाव के लिए विशेषज्ञ कुछ महत्वपूर्ण उपाय अपनाने की सलाह देते हैं। जलभराव वाले गंदे पानी में न चलें, यदि जरूरी हो तो वाटरप्रूफ जूते और दस्ताने पहनें। शरीर पर किसी भी कट या घाव को अच्छी तरह ढककर रखें। बारिश में भीगने के बाद साफ पानी से स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर और आसपास सफाई रखें, ताकि चूहों की संख्या कम हो। खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें और स्वच्छ पेयजल का ही उपयोग करें।

यदि किसी व्यक्ति को बारिश या गंदे पानी के संपर्क में आने के बाद तेज बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उचित एंटीबायोटिक उपचार से अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, जबकि इलाज में देरी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान थोड़ी-सी सावधानी इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। स्वच्छता बनाए रखना, गंदे पानी से बचना और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना न केवल व्यक्ति की सुरक्षा करता है, बल्कि संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी मदद करता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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