भोपाल/लखनऊ: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में करीब छह महीने पहले बनी खैरा-डिठौरा सड़क का बड़ा हिस्सा तेज बारिश और पानी के बहाव में बह गया। इस सड़क के निर्माण पर करीब ₹104 करोड़ खर्च होने की बात सामने आई है। सड़क के इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त होने के बाद इसकी गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सीधी में 104 करोड़ की सड़क का बड़ा हिस्सा बहा
सीधी जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र में खैरा-डिठौरा मार्ग पर बारिश का असर सबसे ज्यादा दिखाई दिया। तेज पानी के बहाव से सड़क का एक बड़ा हिस्सा कटकर बह गया, जिससे इस मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक सड़क करीब छह महीने पहले ही तैयार हुई थी।
नई सड़क के इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सड़क की जल निकासी व्यवस्था और निर्माण कार्य की मजबूती को लेकर भी चर्चा है। संबंधित अधिकारी मौके की स्थिति का जायजा लेकर मार्ग को जल्द बहाल करने की कोशिश में जुटे हैं।
मध्य प्रदेश में कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात
पूर्वी मध्य प्रदेश में लगातार तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। रीवा, सतना, चित्रकूट और पन्ना समेत कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति सामने आई है। कुछ निचले इलाकों में घरों तक पानी पहुंचने की खबरें हैं, जबकि कई सड़कों पर जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है।
सतना के नागौद में 24 घंटे के दौरान 6.4 इंच बारिश दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट है। लगातार बारिश के कारण प्रशासन ने नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास सावधानी बरतने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश के 19 जिले बाढ़ की चपेट में
उत्तर प्रदेश में भी गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 19 बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा की है। प्रशासन को राहत और बचाव कार्य तेज करने तथा प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ से बड़ी आबादी प्रभावित होने की रिपोर्ट है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर राहत व्यवस्था की जा रही है।
वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों और आसपास के इलाकों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। कई घाट पानी में डूब चुके हैं और नदी किनारे के निचले इलाकों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी ने पूर्वांचल में बाढ़ का खतरा बढ़ाया है। वाराणसी के कई निचले इलाकों और घाटों पर पानी पहुंचने से स्थानीय गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।
घरों और सड़कों में घुसा पानी
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर रिहायशी इलाकों पर भी पड़ा है। कई जगहों पर सड़कें जलमग्न होने से यातायात प्रभावित हुआ है। मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में पानी घरों के अंदर तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की बढ़ी चुनौती
भारी बारिश के बीच सबसे बड़ी चुनौती निचले इलाकों में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाना और सड़क संपर्क बनाए रखना है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई है। नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
मध्य प्रदेश में टूटी सड़क की मरम्मत और उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य फिलहाल प्राथमिकता बने हुए हैं।
आगे भी सतर्क रहने की जरूरत
मौसम के सक्रिय रहने से आने वाले दिनों में स्थिति में बदलाव हो सकता है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है। फिलहाल MP से UP तक बारिश ने सड़क, पुल, नदी और रिहायशी इलाकों पर असर डाला है, जबकि वाराणसी और अन्य बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।








