लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। राहुल गांधी का कहना था कि हाल के घटनाक्रमों ने लाखों छात्रों के भविष्य और उनके विश्वास को प्रभावित किया है, इसलिए सरकार को जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय केंद्र सरकार लगातार उन्हें नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का रवैया युवाओं के हित में नहीं है। उनके मुताबिक, छात्र केवल अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले प्रधानमंत्री को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। दूसरी मांग यह रही कि छात्रों की शिकायतों और विवादित मामलों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके। तीसरी मांग के तहत उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार तत्काल प्रभाव से ऐसे ठोस कदम उठाए, जिससे भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो और युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कायम रहे।
राहुल गांधी ने कहा कि देश का युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनके भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता न करे। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि छात्रों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया तो इसका असर देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के विश्वास पर पड़ेगा।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों के अधिकारों की लड़ाई संसद से लेकर सड़क तक लड़ता रहेगा। उन्होंने सभी छात्र संगठनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है।
वहीं, भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छात्रों से जुड़े इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आने वाले दिनों में सियासी टकराव और तेज हो सकता है। फिलहाल इस बयान के बाद शिक्षा और छात्र हितों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।








