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June 21, 2024 1:03 pm

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रविवार को प्रयागराज के फूलपुर में आयोजित संयुक्त रैली; राहुल गांधी और अखिलेश यादव को बिना बोले क्यों जाना पड़ा? प्रयागराज की जनसभा से….

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रविवार को प्रयागराज के फूलपुर में आयोजित संयुक्त रैली में राहुल गांधी और अखिलेश यादव को बिना भाषण दिए लौटना पड़ा.

रविवार को इंडिया गठबंधन की दो संयुक्त रैलियां थी. एक फूलपुर में और दूसरी नैनी शहर में.

भीड़ बैरिकेड तोड़कर मंच तक पहुंच गई जिससे सभा में अफ़रातफ़री का माहौल बन गया.

सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को मंच तक आने से रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ मंच तक पहुंच गई.

उस वक्त समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव सभा को संबोधित कर रहे थे.

अचानक भीड़ के मंच तक पहुंचने के बाद उन्हें अपना भाषण रोकना पड़ा. भीड़ में ज़्यादातर समाजवादी पार्टी के समर्थक मौजूद थे.

मंच पर मौजूद सपा नेता दूधनाथ पटेल बताते हैं, “कार्यकर्ताओं की भीड़ बैरिकेड तोड़कर मंच तक पहुंच गई. अफरातफरी में माइक का तार टूट गया. माइक बंद होने से अव्यवस्था फैल गई.”

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वे कहते हैं, “माइक चलता रहता तो भीड़ को कंट्रोल किया जा सकता था, लेकिन वो नहीं हो पाया.”

दूधनाथ पटेल ने बताया, “रैली में उम्मीद से अधिक संख्या में भीड़ आ गई थी. एक किलोमीटर तक भीड़ और गाड़ी ही नज़र आ रही थी. अपेक्षाकृत सुरक्षाकर्मियों की संख्या बहुत कम थी.”

वे कहते हैं, “दोनों नेता सूझबूझ दिखाते हुए बिना बोले सभा से चले गए. अखिलेश यादव ने जाते समय सभा स्थल के ऊपर चार-पांच बार हेलीकॉप्टर भी घुमाया.”

सुरक्षा व्यवस्था में चूक?

वहीं कांग्रेस के इलाहाबाद जिलाध्यक्ष सुरेश यादव कहते हैं, “हमारी ओर से इस मामले में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई गई है, क्योंकि जनमानस कल की सभा में राहुल गांधी जी को देखने के लिए उमड़ पड़े थे. जनता से बड़ा कौन है और जनता को कौन रोक सकता है?”

लेकिन फिर भी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इसे गंभीर चूक माना जा रहा है.

पूर्व कांग्रेस विधायक अनुग्रह नारायण सिंह फूलपुर की सभा में मंच तक भीड़ पहुंचने को सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक मानते हैं.

अनुग्रह नारायण कहते हैं, “लोगों में उत्साह है, बदलाव के लिए जनता उत्साहित है, लेकिन दोनों नेताओं की सुरक्षा में प्रशासन की ओर से यह भारी चूक है. राहुल जी के यहां सुरक्षा चूक की वजह से दो-दो शहादत हो चुकी है. राहुल जी से ज्यादा ख़तरा किसे हो सकता है?”

वहीं समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय यादव ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बीबीसी से कहा, “पंडाल के मानक से ज्यादा भीड़ थी. पुलिस फोर्स ज्यादा नहीं थी. सरकार की जवाबदेही है कि देश के दो बड़े नेता आ रहे हैं तो उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं दे पा रही है?”

सुरक्षा चूक के कारण पूछने पर अनुग्रह नारायण सिंह कहते हैं, “कल यहां सत्ता पक्ष की ओर से गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ आए थे, लेकिन चुनाव के समय कोई गृह मंत्री कोई मुख्यमंत्री नहीं होता है, सब समान होते हैं क्योंकि चुनाव, चुनाव आयोग के निर्देशन में हो रहा है.”

गंगानगर के डीसीपी अभिषेक भारती ने स्थानीय मीडिया से सुरक्षा व्यवस्था पर कहा, “दोनों पार्टियों के ज़िलाध्यक्षों के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर एक दिन बैठक हुई थी. सुरक्षा मानकों का ख्याल आयोजकों ने नहीं रखा. मंच पर माइक नहीं चलने से अव्यवस्था हुई. वहां पर्याप्त पुलिस बल की ड्यूटी लगाई गई थी.”

पहली सभा के बाद हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दूसरी सभा प्रयागराज के नैनी में की.

सपा विधायक संदीप पटेल ने बताया, “नैनी की सभा में मैं मौजूद था, सभा शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई. दोनों नेताओं ने सभा को संबोधित किया. जनता बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ सड़क पर है.”

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भीड़ के क्या हैं मायने

सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी की सभा में आई भीड़ देखकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि जनसभा में उमड़ी भीड़ परिवर्तन का संकेत दे रही है.

प्रयागराज जनपद में दो लोकसभा सीटें इलाहाबाद और फूलपुर हैं. वर्तमान समय में दोनों सीटों पर भाजपा सांसद हैं, लेकिन दोनों लोकसभा सीटों पर भाजपा ने उम्मीदवार बदल दिए हैं.

फूलपुर लोकसभा ऐसिहासिक सीट है. यहां से भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू तीन बार चुनाव जीते थे.

फूलपुर लोकसभा सीट से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजयलक्ष्मी पंडित, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बाहुबली अतीक अहमद जैसे बड़े चेहरे चुनाव जीत चुके हैं.

इस बार इंडिया गठबंधन की ओर से पूर्व में बसपा और भाजपा नेता रहे अमरनाथ मौर्य को मैदान में उतारा है.

वहीं भाजपा ने मौजूदा सांसद केसरी देवी पटेल का टिकट काटकर कई बार के विधायक रहे महेंद्र पटेल के बेटे व फूलपुर विधायक प्रवीण पटेल को मैदान में उतारा है.

इलाहाबाद लोकसभा से भाजपा ने मौजूदा सांसद रीता बहुगुणा जोशी का टिकट काटकर कई बार के विधायक और राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के बेटे नीरज त्रिपाठी को मैदान में उतारा है.

वहीं सपा ने इस सीट पर कई बार के विधायक रहे रेवती रमण सिंह के बेटे उज्ज्वल रमण सिंह को टिकट दी है.

बीजेपी ने क्या कहा

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता आनंद दुबे मानते हैं कि इस भीड़ का चुनावी नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

आनंद दुबे कहते हैं, “सबसे बड़ी बात है कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी जी को फूलपुर और प्रयागराज की जनता ने बेरंग वापस लौटा दिया. उन्हें सुना ही नहीं. अखिलेश यादव जी 2022 विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह की भीड़ लेकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर जाम लगाया था.”

“भीड़ वाली तस्वीरें शेयर कर रहे थे लेकिन परिणाम सबको याद हैं. इस तरह की भीड़ दिखा कर अगर राहुल गांधी और अखिलेश यादव सोच रहे हैं चुनाव जीत जाएंगे तो यह उनकी गलतफहमी है.”

इन दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की स्थिति के बारे में आनंद दुबे दावा करते हैं, “भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर बहुत मजबूत स्थिति में है. फूलपुर और इलाहाबाद दोनों सीटों पर बड़े अंतर से हम चुनाव जीत रहे हैं.”

क्या कहते हैं जानकार

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रयागराज की दोनों सीटों पर लड़ाई करीबी मुकाबले में पहुंच चुकी है इसलिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव की संयुक्त रैली का आयोजन दोनों सीटों पर किया गया था.

प्रयागराज के वरिष्ठ पत्रकार गुरुदीप त्रिपाठी कहते हैं, “अपने नेताओं से मिलने के लिए समर्थक खुद को नहीं रोक पाए और वे बैरिकेडिंग तोड़कर उनके पास पहुंच गए. अपने समर्थकों का यह प्यार और जोश देखकर राहुल और अखिलेश ने उन्हें समझाया और 25 मई को पहले मतदान करने की अपील कर लौट गए.”

वे कहते हैं, “क्षेत्र की उमड़ी जनता का अपने नेताओं के प्रति यह आकर्षण बताने के लिए काफी है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन इस बार भाजपा पर भारी पड़ सकता है.”

जानेमाने इतिहासकार हेरम्ब चतुर्वेदी सभा में आई भीड़ द्वारा बैरिकेड तोड़ने को अलग नज़र से देख रहे हैं.

हेरम्ब चतुर्वेदी कहते हैं, “रैली में आई भीड़ के अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग मायने हैं. मुलायम सिंह के समय में समाजवादियों पर अराजकता का आरोप लगता रहा है. ऐसा लगता है नेता जी की पकड़ ढीली होने के बाद जमीनी स्तर की पकड़ किसी में नहीं है. यह एक अराजकता का स्तर भी है.”

वे कहते हैं, “दूसरे स्तर पर इसे जोश से जोड़ कर देख सकते हैं. दो बड़े नेता एकदम से दिखे भीड़ जोश से भर गई. तीसरा स्तर बहुत साफ था कि थोड़ी दूर पर इसी जनपद में अमित शाह और योगी की सभा हो रही थी. पुलिस महकमा वहां था.”

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के सहायक शिक्षक दीनानाथ मौर्य रैली में आ रही भीड़ के संदर्भ में कहते हैं, “फूलपुर में इंडिया गठबंधन की रैली में सुरक्षा व्यवस्था में चूक का मामला तो है ही साथ ही कल की रैली इस बात का संकेत है कि चौथे चरण के बाद से माहौल बदला है.”

वे कहते हैं, “इसमें इंडिया गठबंधन की ओर से संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने के नारे की अहम भूमिका है. हवा इंडिया गठबंधन के पक्ष में है, यह देखना होगा कि यह वोट में तब्दील होती है कि नहीं?”

 

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