Explore

Search

October 27, 2026 12:26 pm

लेटेस्ट न्यूज़

नतीजों के बीच सियासी घमासान! मोकामा से गोरखपुर तक कहीं जश्न, कहीं विवाद और आरोपों की बौछार

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

विधान परिषद (MLC) चुनावों की मतगणना और नतीजों के बीच बिहार से उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक माहौल गर्म नजर आया। कहीं जीत की उम्मीद में जश्न की तैयारियां हुईं, तो कहीं मतदान के दौरान हुए विवादों और आरोपों ने सुर्खियां बटोरीं। बिहार के मोकामा से लेकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तक चुनावी मुकाबले के बीच राजनीतिक दलों के समर्थक आमने-सामने आए। कुछ जगहों पर कहासुनी और हंगामे की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

मोकामा में जेडीयू और जन सुराज समर्थकों के बीच विवाद

बिहार के मोकामा में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज रही। यहां जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार और जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह के बीच मुकाबला चर्चा में रहा। मोकामा में जेडीयू और जन सुराज समर्थकों के बीच कहासुनी के बाद तनाव की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और हालात को नियंत्रित किया।

इस चुनाव में मोकामा के विधायक अनंत सिंह की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने अपनी ही पार्टी जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी।

अनंत सिंह के समर्थन को लेकर जेडीयू में भी हलचल

पटना स्नातक सीट पर उम्मीदवार को लेकर जेडीयू के भीतर भी असहज स्थिति देखने को मिली। अनंत सिंह के पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ दूसरे प्रत्याशी का समर्थन करने के मामले ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ाया। इसके बाद जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश किए जाने की जानकारी भी दी।

इस घटनाक्रम के बीच मोकामा में चुनावी मुकाबला केवल उम्मीदवारों की जीत-हार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के भीतर अनुशासन और राजनीतिक समर्थन का मुद्दा भी चर्चा में आ गया।

गोरखपुर में सपा प्रत्याशी के विरोध से बढ़ा तनाव

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी विधान परिषद चुनाव के दौरान विवाद की स्थिति बनी। रिपोर्टों के अनुसार, डीएवी डिग्री कॉलेज मतदान केंद्र पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी संजय त्रिपाठी के विरोध को लेकर भाजपा के बूथ एजेंटों और सपा पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद के दौरान मतदान स्थल के बाहर बयान देने और टेंट लगाने को लेकर भी आपत्ति जताई गई। स्थिति को शांत कराने के लिए पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

गोरखपुर की घटना ने चुनावी माहौल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दोनों दलों के बीच तनाव को उजागर किया। हालांकि, अलग-अलग पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जा सकती है।

मुजफ्फरनगर और कन्नौज में भी हुई कहासुनी

उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से भी चुनाव के दौरान विवाद की खबरें सामने आईं। मुजफ्फरनगर में मंत्री कपिल देव अग्रवाल के मतदान केंद्र पहुंचने के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच हंगामे की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया।

कन्नौज में मतदान केंद्र के भीतर मोबाइल फोन ले जाने को लेकर भाजपा कार्यकर्ता और पुलिसकर्मी के बीच बहस हुई। मामला बढ़ने पर अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति शांत कराई। इन घटनाओं ने मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज कर दी।

चार राज्यों में हुए MLC चुनाव पर टिकी निगाहें

विधान परिषद चुनावों के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान हुआ। उत्तर प्रदेश में 11 और बिहार में आठ सीटों सहित चार राज्यों में कुल 28 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया चर्चा में रही। उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले को खास महत्व दिया गया, जबकि बिहार में पटना स्नातक सीट पर जेडीयू और जन सुराज समर्थित उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा सुर्खियों में रही।

मतदान के दौरान सामने आए विवादों के बावजूद चुनावी प्रक्रिया को लेकर अंतिम तस्वीर मतगणना और आधिकारिक परिणामों से ही स्पष्ट होती है। अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए आरोपों को भी पुष्टि से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

नतीजों के साथ राजनीतिक समीकरणों पर भी नजर

मोकामा से गोरखपुर तक सामने आए घटनाक्रम ने दिखाया कि विधान परिषद चुनाव केवल सीटों की जीत-हार तक सीमित नहीं हैं। उम्मीदवारों के समर्थन, दलों के भीतर मतभेद, कार्यकर्ताओं के बीच टकराव और मतदान केंद्रों पर हुए विवादों ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। अब सभी की नजर आधिकारिक नतीजों और उनके बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर