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September 1, 2026 4:46 pm

मनुस्मृति पर बयानबाजी से बढ़ी सियासी गर्मी! शंकराचार्य बनाम राहुल गांधी, बीजेपी समर्थकों ने कांग्रेस को घेरा

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नुस्मृति को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान के बाद देश की सियासत में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। मामला महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर राहुल गांधी की टिप्पणी से शुरू हुआ, लेकिन इसके बाद बीजेपी, कांग्रेस और धार्मिक संतों के बीच बयानबाजी तेज हो गई। पुणे में 22 अगस्त को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए मनुस्मृति का संदर्भ दिया था।

राहुल गांधी ने मनुस्मृति को लेकर क्या कहा?

राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकारों पर बोलते हुए मनुस्मृति में महिलाओं को पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रखने से जुड़े विचार का जिक्र किया। उन्होंने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए कहा कि महिलाएं किसी पुरुष की संपत्ति या पहचान नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान है। उन्होंने महिलाओं से पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता हिंदू धार्मिक परंपराओं और प्राचीन ग्रंथों को निशाना बना रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी की बात का केंद्र महिला अधिकार, समानता और पितृसत्ता के खिलाफ लड़ाई था।

बीजेपी ने किया पलटवार

बीजेपी की ओर से राहुल गांधी के बयान पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आईं। पार्टी नेताओं ने उनके मनुस्मृति संबंधी ज्ञान पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भारतीय धर्मग्रंथों और परंपराओं को समझने की जरूरत है।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मनुस्मृति के कुछ श्लोकों का हवाला दिया और उन्हें ग्रंथ को पढ़ने-समझने की सलाह दी।

इसके बाद बीजेपी ने राहुल गांधी के पुराने बयानों और वीडियो को भी सामने लाकर उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि महिला स्वतंत्रता और अधिकारों की बात है, तो अलग-अलग धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर एक समान दृष्टिकोण क्यों नहीं अपनाया जाता।

शंकराचार्य की टिप्पणी से बढ़ा विवाद

मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी और धार्मिक संतों के बीच मतभेद भी पहले सामने आ चुके हैं। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पूर्व में राहुल गांधी की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनके बयान के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी की आलोचना को राजनीतिक समर्थन दिया था, जबकि कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया।

इस पृष्ठभूमि के कारण मौजूदा विवाद को भी केवल एक बयान तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। मनुस्मृति, हिंदू परंपरा, महिला अधिकार और संविधान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले से चली आ रही बहस इसमें फिर सामने आ गई है।

‘चुनावी हिंदू’ वाले आरोप पर भी सियासत

विवाद बढ़ने के साथ बीजेपी समर्थकों की ओर से कांग्रेस और राहुल गांधी पर ‘चुनावी हिंदू’ जैसे राजनीतिक तंज भी किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस समर्थक इसे बीजेपी की ओर से मुद्दे को धार्मिक रंग देने की कोशिश बता रहे हैं।

यानी एक ही बयान को लेकर दोनों खेमों की राजनीतिक व्याख्या बिल्कुल अलग है। बीजेपी इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं के प्रति कांग्रेस के रवैये से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे महिलाओं के अधिकार और सामाजिक समानता की बहस के रूप में पेश कर रही है।

हिजाब वाले पुराने वीडियो पर भी घिरी कांग्रेस

विवाद के दौरान बीजेपी ने राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो साझा किया, जिसमें उनसे हिजाब पहनने वाली महिलाओं की पसंद और स्वतंत्रता को लेकर सवाल किया गया था। बीजेपी ने इस वीडियो के आधार पर राहुल गांधी पर अलग-अलग धर्मों के मामलों में अलग-अलग मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।

इस पर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर बहस और तेज हो गई। बीजेपी का सवाल था कि महिला स्वतंत्रता का सिद्धांत सभी महिलाओं के लिए समान होना चाहिए, जबकि कांग्रेस का जोर इस बात पर रहा कि राहुल गांधी की मूल टिप्पणी महिलाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा से संबंधित थी।

योगी आदित्यनाथ ने भी साधा निशाना

विवाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भी जुड़ा। उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणी को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के प्रति आपत्तिजनक बताते हुए उन्हें वेदों और भारतीय परंपराओं को समझने की सलाह दी। बीजेपी की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि महिला सम्मान को केवल किसी एक ग्रंथ या धार्मिक परंपरा के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता।

इसके जवाब में कांग्रेस ने राहुल गांधी के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं की समानता और स्वतंत्रता की बात करना था, न कि किसी धर्म या समुदाय का अपमान करना।

मनुस्मृति बनाम संविधान की पुरानी बहस

मनुस्मृति को लेकर भारतीय राजनीति में विवाद नया नहीं है। संविधान और मनुस्मृति को लेकर राजनीतिक बहस लंबे समय से होती रही है। राहुल गांधी भी पहले संसद में संविधान के संदर्भ में मनुस्मृति का उल्लेख कर चुके हैं।

मनुस्मृति की व्याख्या को लेकर इतिहासकारों, धार्मिक विद्वानों और राजनीतिक नेताओं के बीच अलग-अलग मत रहे हैं। इसी वजह से जब भी कोई बड़ा राजनीतिक नेता इसका उल्लेख करता है, तो बहस केवल धार्मिक ग्रंथ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, समानता, महिला अधिकार और संविधान तक पहुंच जाती है।

अब सियासी बहस का केंद्र क्या?

फिलहाल विवाद के दो प्रमुख पक्ष दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस राहुल गांधी की टिप्पणी को महिला स्वतंत्रता और पितृसत्ता के खिलाफ राजनीतिक संदेश के तौर पर पेश कर रही है। वहीं बीजेपी इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं पर राहुल गांधी के हमले के रूप में देख रही है।

ऐसे में मनुस्मृति का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होता है या महिला अधिकार और सामाजिक समानता की व्यापक चर्चा में बदलता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल राहुल गांधी के बयान, बीजेपी के पलटवार और शंकराचार्य की आपत्तियों ने सियासी पारा जरूर चढ़ा दिया है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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