नई दिल्ली। देश की प्रमुख स्टॉक ब्रोकिंग और फिनटेक कंपनी एंजल वन (Angel One) के फाउंडर, चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश ठक्कर ने रियल एस्टेट जगत में तहलका मचा दिया है। उन्होंने मुंबई के पॉश जुहू इलाके में स्थित एक पूरा रेसिडेंशियल टावर ₹711 करोड़ में खरीद लिया है।
यह सौदा मुंबई के सबसे महंगे प्रॉपर्टी डील्स में शुमार हो गया है। ठक्कर ने इस टावर को नया नाम ‘एंजेलस’ (Angelus) दिया है।
कहां है यह लग्जरी टावर?
जुहू के तारा रोड पर स्थित एम्बेसी टेराजा प्रोजेक्ट में यह सौदा हुआ है। टावर लगभग 63,000 वर्ग फुट कारपेट एरिया में फैला है। इसमें ग्राउंड के साथ सात मंजिलें हैं।
इस डील की सबसे चौंकाने वाली बात इसका रेट है। यह सौदा करीब 1.13 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट की रिकॉर्ड दर पर पूरा हुआ है। एम्बेसी डेवलपमेंट्स के इस प्रोजेक्ट में कुल पांच टावर हैं और पूरे परिसर में सिर्फ 50 अल्ट्रा-लग्जरी घर बनाए जा रहे हैं। दो एकड़ से अधिक में फैले इस प्रोजेक्ट में दिनेश ठक्कर का ‘एंजेलस’ टावर अपनी प्राइवेसी, भव्यता और विश्वस्तरीय लाइफस्टाइल के लिए चर्चा में रहेगा।
40 साल तक किराए के मकान में रहे
आज दिनेश ठक्कर हाई-एंड लाइफस्टाइल और फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं, लेकिन उनकी शुरुआत बहुत साधारण थी। वे लगभग 38 से 40 साल की उम्र तक रेंटेड अपार्टमेंट्स में ही रहे। उनका मानना था कि करियर के शुरुआती और ग्रोथ वाले दौर में रियल एस्टेट में भारी पूंजी ब्लॉक करने के बजाय उसे अपने कारोबार में लगाना ज्यादा समझदारी है। जब कारोबार और पारिवारिक जीवन पूरी तरह स्थिर हो गए, तभी उन्होंने अपना खुद का आशियाना बनाया।
डॉट-कॉम बबल में डूबी 80% पूंजी
सफलता की राह कभी आसान नहीं होती। साल 2001 में उन्होंने एक ऑनलाइन इंटरनेट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में भारी निवेश किया था। उसी दौरान वैश्विक डॉट-कॉम बबल फूटा और उनकी लगभग 80% जमा पूंजी डूब गई। कंपनी बंद होने की कगार पर पहुंच गई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गलतियों से सीखकर दोबारा कारोबार खड़ा किया और जबर्दस्त कमबैक किया।
एंजल वन की सफलता की कहानी
दिनेश ठक्कर ने 1996 में पारंपरिक स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी के रूप में एंजेल ब्रोकिंग की नींव रखी थी। वक्त की नब्ज पहचानते हुए कंपनी ने 2019 में पूरी तरह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन शुरू किया और नाम बदलकर Angel One हो गया। आज यह प्लेटफॉर्म देश के करोड़ों रिटेल निवेशकों और ट्रेडर्स को सेवाएं दे रहा है।
दिनेश ठक्कर की यह यात्रा साबित करती है कि संघर्ष, धैर्य और सही समय पर सही फैसला व्यक्ति को किराए के मकान से लेकर ₹711 करोड़ के टावर तक पहुंचा सकता है।








