प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत को लेकर बड़ी अपील की है। लगातार बढ़ती ईंधन खपत और ऊर्जा संरक्षण की जरूरत को देखते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि जहां संभव हो वहां ऑनलाइन क्लास और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए। खास बात यह रही कि 24 घंटे के भीतर पीएम मोदी ने दूसरी बार इस मुद्दे को उठाते हुए ईंधन बचत को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और ऐसे समय में ऊर्जा संसाधनों का सही उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर भी देश बड़े स्तर पर पेट्रोल और डीजल की बचत कर सकता है। पीएम मोदी के अनुसार यदि स्कूल, कॉलेज, कंपनियां और संस्थान जरूरत के अनुसार ऑनलाइन व्यवस्था अपनाते हैं, तो लाखों लीटर ईंधन बचाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने लोगों से अनावश्यक यात्रा कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के इस दौर में कई काम घर बैठे आसानी से किए जा सकते हैं। वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स को बढ़ावा देने से न सिर्फ ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि ऊर्जा संरक्षण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने, कार पूलिंग अपनाने और जरूरत पड़ने पर ही निजी वाहनों का उपयोग करने की सलाह दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोलियम उत्पादों की खपत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यदि बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा मिलता है, तो इससे ईंधन आयात पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि सभी क्षेत्रों में ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह संभव नहीं है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां भी डिजिटल विकल्प उपलब्ध हैं, वहां उनका उपयोग बढ़ाने से देश को आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों स्तर पर फायदा होगा।
सरकार पहले भी ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अभियान चला चुकी है। अब पीएम मोदी की नई अपील को उसी दिशा में एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां, शिक्षण संस्थान और आम लोग इस सलाह को किस स्तर तक अपनाते हैं।








