नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम इलाके सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर 2026) को दोपहर में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर ढह गई। यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित थी और बॉयज पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। हादसे में कई छात्र और अन्य लोग मलबे के नीचे दब गए। बचाव अभियान के दौरान कम से कम तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
इस दर्दनाक घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए कहा कि दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद और विचलित करने वाली है। पीएम मोदी ने लिखा, “दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद है। अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। अधिकारी घटनास्थल पर काम कर रहे हैं और हादसे से प्रभावित लोगों की सहायता कर रहे हैं।”
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी इस बयान को साझा करते हुए दोहराया कि प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना जताई है और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और बचाव व राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
हादसा दोपहर के समय हुआ जब इमारत में कई छात्र मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इमारत पुरानी थी और उसमें कुछ मरम्मत या निर्माण संबंधी कार्य चल रहे थे। मलबे से कई लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ, दिल्ली दमकल विभाग, पुलिस, डीडीएमए, एमसीडी और अन्य एजेंसियों की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया गया। बचाव अभियान कई घंटों तक चला।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं और बचाव कार्यों की निगरानी की। उन्होंने अस्पताल जाकर घायलों की हालत का जायजा लिया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि चाहे इमारत का मालिक हो या कोई अधिकारी, दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों से बात कर स्थिति की जानकारी ली।
इस हादसे ने दिल्ली में जर्जर और अवैध निर्माण वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्य निकेतन क्षेत्र छात्र आवास के लिए जाना जाता है, जहां कई पुरानी इमारतों को पीजी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। विपक्षी दलों ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान उस समय आया जब बचाव दल अभी भी मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे थे। उनके संदेश से शोकसंतप्त परिवारों को सांत्वना मिलने की उम्मीद है। अधिकारी लगातार घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों की मदद में जुटे हुए हैं।
यह घटना दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चर्चा का विषय बन गई है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुरानी और असुरक्षित इमारतों की गहन जांच की जाए तथा छात्र आवास की स्थिति में सुधार लाया जाए।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है। मौतों और घायलों की संख्या में आगे बदलाव संभव है।)








