देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 83 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें लागू होने के बाद कई शहरों में पेट्रोल और डीजल के रेट रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए हैं।
ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ने वाला है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर परिवहन और माल ढुलाई तक सभी सेवाओं की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आने वाले दिनों में खाने-पीने की वस्तुओं और अन्य जरूरी सामानों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी की वजह से घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।
दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता समेत देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए गए हैं। कई राज्यों में वैट और स्थानीय टैक्स अलग-अलग होने के कारण कीमतों में अंतर देखा जा रहा है। महानगरों के अलावा छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी ईंधन महंगा होने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
विपक्षी दलों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है, जबकि सरकार राहत देने में नाकाम साबित हो रही है। वहीं सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में और इजाफा हो सकता है। फिलहाल आम जनता को महंगाई की एक और मार झेलनी पड़ रही है।








