इस्लामाबाद: पाकिस्तान के एक मौलाना का हूती संगठन को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना ने हूती को आतंकवादी बताते हुए उनकी धार्मिक पहचान पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें मुस्लिम नहीं माना जा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब यमन के हूती संगठन की गतिविधियों और मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है।
मौलाना इससे पहले अल-कायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन को लेकर दिए गए अपने बयानों के कारण भी चर्चा में रहे हैं। रिपोर्टों में उनके पुराने बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने लादेन को ‘योद्धा’ के तौर पर पेश किया था। अब हूती को लेकर उनके रुख ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
हूती को बताया आतंकी संगठन
मौलाना ने अपने बयान में हूती आंदोलन पर निशाना साधते हुए उसे आतंकवाद से जोड़ा। उन्होंने हूती की विचारधारा और क्षेत्रीय गतिविधियों पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने हूती के धार्मिक स्वरूप को लेकर भी टिप्पणी की और उन्हें मुस्लिम मानने से इनकार किया।
हूती आंदोलन यमन में सक्रिय एक राजनीतिक और सशस्त्र संगठन है। यह संगठन लंबे समय से यमन के गृहयुद्ध और क्षेत्रीय संघर्षों में एक प्रमुख पक्ष रहा है। पिछले कुछ वर्षों में लाल सागर क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के कारण हूती अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में भी रहे हैं।
लादेन पर पुराने बयान की भी चर्चा
मौलाना के ताजा बयान के साथ ही उनके पुराने बयानों का भी जिक्र हो रहा है। ओसामा बिन लादेन अल-कायदा का संस्थापक था और अमेरिका समेत कई देशों द्वारा आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े संगठन के प्रमुख के रूप में माना गया था। 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी अभियान में उसकी मौत हुई थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी मौलाना ने अतीत में लादेन को ‘योद्धा’ बताया था। इसी वजह से उनके नए बयान की तुलना पुराने रुख से की जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स उनके दोनों बयानों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
हूती और मध्य-पूर्व का संघर्ष
हूती आंदोलन का प्रभाव मुख्य रूप से यमन में है। संगठन ने यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद देश के राजनीतिक और सैन्य संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हूती खुद को अंसार अल्लाह के नाम से भी संबोधित करते हैं।
इजरायल-हमास युद्ध के बाद हूती की गतिविधियां लाल सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्र तक भी चर्चा का विषय बनीं। संगठन ने कई जहाजों को निशाना बनाने की कार्रवाई को गाजा के समर्थन से जोड़ा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इन हमलों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है।
बयान को लेकर बहस तेज
मौलाना के बयान के बाद बहस केवल हूती की गतिविधियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके धार्मिक और राजनीतिक विचारों को लेकर भी चर्चा होने लगी है। एक तरफ उनके समर्थक उनके मौजूदा बयान को हूती की गतिविधियों के संदर्भ में देखते हैं, वहीं आलोचक उनके पुराने लादेन संबंधी बयान का हवाला दे रहे हैं।
हालांकि, मौलाना के बयान और विभिन्न संगठनों की आधिकारिक स्थिति के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी धार्मिक नेता का व्यक्तिगत बयान किसी पूरे धार्मिक समुदाय की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करता। हूती की धार्मिक पहचान और राजनीतिक विचारधारा को लेकर भी अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं।
फिलहाल पाकिस्तानी मौलाना का यह बयान सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर चर्चा करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर सुर्खियों में है। उनके पुराने लादेन संबंधी बयान और हूती को लेकर मौजूदा टिप्पणी की तुलना की जा रही है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है।








