चेन्नई। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ‘बुरी ताकतों’ और ‘सत्ता परिवर्तन’ वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए CPI(M) के तमिलनाडु राज्य सचिव के. षणमुगम ने बुधवार को तीखा हमला बोला है। षणमुगम ने कहा कि देश में हो रहे मौजूदा विरोध प्रदर्शन जनता की विशिष्ट मांगों को लेकर हैं, न कि किसी ‘स्वर्ण युग’ की सरकार को गिराने की साजिश। उन्होंने संघ पर आरोप लगाया कि वह जनता की समस्याओं और शिकायतों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा सरकार की छवि चमकाने में जुटा है।
’कम्युनिस्ट सत्ता बदलना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा विरोध मांगों पर आधारित’
नागपुर में मंगलवार को आरएसएस के वार्षिक विजयादशमी उत्सव के दौरान मोहन भागवत के दिए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए षणमुगम ने कहा कि कम्युनिस्ट निश्चित रूप से आरएसएस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को सत्ता से हटाना चाहते हैं, लेकिन इस समय देशभर में चल रहे आंदोलन सीमित और वास्तविक मांगों पर केंद्रित हैं।
षणमुगम ने कहा, ‘आरएसएस प्रमुख का दावा है कि ये आंदोलन सत्ता बदलने के लिए हो रहे हैं और इनसे मौलिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा। हम कम्युनिस्ट के रूप में इस सरकार को हटाना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता भली-भांति जानती है कि अभी जो प्रदर्शन हो रहे हैं, वे विशिष्ट मुद्दों और मांगों को लेकर हैं। ‘
भागवत पर तंज कसते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए इस तरह से ध्यान भटकाने की कोशिश न करें जैसे आप किसी स्वर्ण युग का संचालन कर रहे हों और हम उसे गिराने की साजिश कर रहे हैं।’
क्या कहा था मोहन भागवत ने
नागपुर में विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से किए जाने वाले आंदोलनों से बुनियादी समस्याएं हल नहीं होतीं। बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हाल के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए भागवत ने चेतावनी दी थी कि कुछ ‘बुरी ताकतें’ अपने निजी स्वार्थों के लिए विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक औजार बनाकर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।
भागवत ने कहा था कि लोकतंत्र में समस्याएं और प्रदर्शन स्वाभाविक हैं, लेकिन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में कड़वाहट या वैमनस्य फैलाना। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन से संविधान की मर्यादाओं और नागरिक आचरण के दायरे में रहकर काम करने की अपील की थी।








