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August 23, 2026 3:23 pm

रू76 लाख की ठगी में करीब 50 लाख होल्ड,डिजिटल अरेस्ट के दौरान पुलिस की त्वरित कार्रवाई

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स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार, बैंकिंग ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली-एनसीआर तक पहुंची पुलिस

जयपुर। साइबर अपराधियों द्वारा पुलिस, एटीएस और एनआईए अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग दंपती को कथित आतंकवादी गतिविधियों एवं मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी देकर की गई रू76 लाख की साइबर ठगी के मामले में राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब रू50 लाख की राशि होल्ड करवाई है। मामले में पुलिस ने अखंड प्रताप सिंह निवासी गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश और सतपाल सिंह निवासी गाजीपुर, दिल्ली को गिरफ्तार किया है।महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधों, विशेषकर डिजिटल अरेस्ट के मामलों में प्रभावी कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि 14 अगस्त को प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस ने ठगी की रकम की मनी ट्रेल, आरोपियों के मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया।

व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का खेल
जयपुर निवासी परिवादी ने पुलिस को बताया कि 5 अगस्त को उनकी पत्नी के मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आई। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से आरोपियों ने खुद को पुलिस, एटीएस और एनआईए का अधिकारी बताते हुए उनके आधार कार्ड के दुरुपयोग से आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपये के वित्तीय अपराध होने की बात कही। आरोपियों ने गिरफ्तारी और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का भय दिखाया।
आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए कथित एनआईए नोटिस भेजकर कुछ दिनों में एनओसी सर्टिफिकेट/सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी करने का झांसा दिया। इसके साथ ही लगातार व्हाट्सएप वॉइस और वीडियो कॉल के माध्यम से दंपती पर निगरानी रखी गई तथा उनके फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी एवं तस्वीरें मंगवाई गईं। दबाव में आकर दंपती ने अपनी बचत को लिक्विडेट कर अलग-अलग बैंक खातों में रू 76 लाख ट्रांसफर कर दिए।

बैंकिंग ट्रेल से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
ठगी की सूचना मिलते ही स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने रकम को बचाने और आरोपियों की पहचान के लिए कार्रवाई शुरू की। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए व्हाट्सएप नंबरों एवं संदिग्ध मोबाइल नंबरों की सीडीआर, सीएएफ आईडी और आईपीडीआर के साथ संबंधित बैंक खातों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।

बैंकिंग ट्रेल से बचाई रकम
बैंकिंग ट्रेल में सामने आया कि ठगी की रकम एक खाते में पहुंचने के बाद उसी दिन आरटीजीएस के माध्यम से दूसरे खाते में तथा अगले दिन अन्य खाते में ट्रांसफर की गई। इस तरह एक खाते से दूसरे खाते में तेजी से रकम        स्थानांतरित किए गए। पुलिस टीम ने बैंकिंग ट्रांजेक्शन की इस कड़ी का तत्काल विश्लेषण करते हुए संबंधित बैंकों से समन्वय किया और ठगी की रू76 लाख की रकम में से करीब रू50 लाख होल्ड करवाए।
तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने अखंड प्रताप सिंह निवासी गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश और सतपाल सिंह निवासी गाजीपुर, दिल्ली को गिरफ्तार किया।

बैंक खाते उपलब्ध कराने में दोनों की भूमिका सामने आई
अनुसंधान में सामने आया कि सतपाल सिंह कपड़ा निर्माण एवं सिलाई के व्यवसाय से जुड़ा है। उसने अपनी कंपनी के कर्मचारी एवं मैनेजर अखंड प्रताप सिंह के बैंक खातों की जानकारी साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराई। इन खातों में साइबर ठगी की रू10 लाख और रू7 लाख की रकम प्राप्त हुई। रकम निकलवाने और अन्य खातों में स्थानांतरित करवाने में भी उसकी भूमिका सामने आई। अनुसंधान के अनुसार उसने कमीशन के लालच में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में सहयोग किया।
वहीं अखंड प्रताप सिंह उर्फ शानू सिंह वर्ष 2013 से सतपाल सिंह के साथ कपड़ा निर्माण संबंधी कार्य से जुड़ा है और वर्तमान में कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर है। अनुसंधान में सामने आया कि सतपाल सिंह के कहने पर उसने अपने केनरा बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध कराई, जिसमें रू7 लाख की रकम प्राप्त हुई और बाद में चेक के माध्यम से आरटीजीएस द्वारा अन्य खाते में ट्रांसफर की गई। पुलिस ने उसकी भूमिका साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे हस्तांतरण के लिए बैंकिंग साधन उपलब्ध कराने के रूप में प्रथम दृष्टया सामने आने की बात कही है।

 

नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस द्वारा व्हाट्सएप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की मनी ट्रेल का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। ठगी की रकम आगे किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच जारी है। कार्रवाई उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, राजस्थान, जयपुर के थानाधिकारी गजेन्द्र शर्मा, उप अधीक्षक पुलिस के नेतृत्व में गठित टीम ने की। जिसमें पुलिस निरीक्षक अजय कुमार, नीरज कुमार, हेड कांस्टेबल बृजलाल, कांस्टेबल सुभाष, किशनलाल, सच्चिदानंद, धर्मेंद्र और सूबे सिंह शामिल थे।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को एनआईए, पुलिस, एटीएस, ईडी अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का भय दिखाए, वीडियो कॉल पर निगरानी रखे या बैंक खाते में पैसे जमा अथवा ट्रांसफर करने का दबाव बनाए तो उसके झांसे में न आएं।
सरकारी एजेंसियां व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को तथाकथित “ डिजिटल अरेस्ट” कर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देती हैं। किसी भी दबाव में धनराशि ट्रांसफर न करें और ऐसी घटना होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। साइबर अपराध की शिकायत 1930 पर की जा सकती है।
 

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