जयपुर। जयपुर के प्रसिद्ध आराध्य देव श्री गोविंददेवजी मंदिर के प्रधान महंत अंजन कुमार गोस्वामी का रविवार को 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके अचानक देवलोकगमन से धार्मिक जगत, मंदिर परिवार और देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार दोपहर करीब 12 बजे उन्हें अचानक साइलेंट हार्ट अटैक आया, जिसके बाद परिजन और मंदिर से जुड़े लोग उन्हें तत्काल दुर्लभजी अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली।
महंत अंजन कुमार गोस्वामी की अंतिम यात्रा रविवार शाम करीब 4:15 बजे जयपुर के सुभाष चौक क्षेत्र स्थित पानों के दरीबे में उनकी पुश्तैनी हवेली से निकाली गई। अंतिम यात्रा में जयपुर के प्रमुख मंदिरों के महंत, संत समाज के प्रतिनिधि, मंदिर से जुड़े सेवक, समाज के लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने नम आंखों से अपने आराध्य मंदिर के महंत को अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा जलमहल के सामने स्थित समाज बाड़ी पहुंची, जहां गोस्वामी परिवार की परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे मानस गोस्वामी ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान मंदिर परिवार और समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।
गौड़ीय वैष्णव परंपरा से था गहरा जुड़ाव
महंत अंजन कुमार गोस्वामी जयपुर की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। वे गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हुए थे और लंबे समय से श्री गोविंददेवजी मंदिर के प्रधान महंत के रूप में ठाकुरजी की सेवा कर रहे थे। महंत होने के साथ-साथ वे मंदिर के एकमात्र सेवाधिकारी और ट्रस्टी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। उन्होंने अपना जीवन भगवान श्री गोविंददेवजी की सेवा, पूजा-अर्चना और मंदिर की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में समर्पित किया।
वे स्वर्गीय प्रद्युम्न कुमार गोस्वामी के बड़े पुत्र थे। उनके पिता ने भी मंदिर की सेवा और व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पिता के निधन के बाद अंजन कुमार गोस्वामी ने मंदिर की जिम्मेदारी संभाली और पारिवारिक धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया। उनके कार्यकाल में मंदिर की व्यवस्थाओं और स्वरूप को व्यवस्थित करने के साथ इसकी भव्यता को भी नई पहचान मिली।
वृंदावन से जयपुर तक जुड़ी है गोविंददेवजी मंदिर की ऐतिहासिक परंपरा
श्री गोविंददेवजी मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व केवल जयपुर तक सीमित नहीं है। इसकी परंपरा गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय और चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्य रूप गोस्वामी से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वृंदावन में भगवान श्री गोविंददेवजी के विग्रह की खोज रूप गोस्वामी ने की थी। बाद में मुगल शासन के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से भगवान के विग्रह को वृंदावन से आमेर लाया गया था।
जयपुर की स्थापना के बाद भगवान श्री गोविंददेवजी के विग्रह को सिटी पैलेस परिसर स्थित जय निवास उद्यान में स्थापित किया गया। इसके बाद से ही गोविंददेवजी जयपुर के आराध्य देव के रूप में प्रतिष्ठित हुए। जयपुर के पूर्व शासक भी भगवान गोविंददेवजी को अपना राजा मानते थे और स्वयं को उनके सेवक के रूप में देखते थे। आज भी यह परंपरा जयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
1972 में पब्लिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत हुआ था मंदिर
गोविंददेवजी मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन एक व्यवस्थित धार्मिक और प्रशासनिक परंपरा के तहत होता है। मंदिर राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग में 20 सितंबर 1972 को पब्लिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत हुआ था। हालांकि, मंदिर की दैनिक व्यवस्थाएं और धार्मिक गतिविधियां स्वतंत्र रूप से संचालित होती हैं।
महंत अंजन कुमार गोस्वामी के परिवार का मंदिर की सेवा से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उनके बेटे मानस कुमार गोस्वामी ने भी अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद मंदिर की सेवा और व्यवस्थाओं में भागीदारी शुरू कर दी थी। अब पिता के निधन के बाद परिवार और मंदिर से जुड़े लोगों के सामने इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताया शोक
महंत अंजन कुमार गोस्वामी के निधन की खबर सामने आने के बाद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उनके देवलोकगमन पर शोक जताया। मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और सेवकों के लिए उनका जाना बड़ी क्षति माना जा रहा है।
महंत अंजन कुमार गोस्वामी का जीवन भगवान श्री गोविंददेवजी की सेवा और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उनके निधन से जयपुर ने एक ऐसे धार्मिक व्यक्तित्व को खो दिया है, जिन्होंने वर्षों तक मंदिर की सेवा और व्यवस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी समझकर निभाया। रविवार को समाज बाड़ी में हुए अंतिम संस्कार के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन के बाद मंदिर परिवार, गोस्वामी समाज और श्रद्धालुओं के बीच शोक का माहौल बना हुआ है।








