मुंबई। नमित मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ का गाना ‘मंगल रंग’ इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी बहस का केंद्र बना हुआ है। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान द्वारा कंपोज किए गए इस गाने में कव्वाली की शैली का प्रभाव दिखने पर कई श्रोताओं ने आपत्ति जताई है। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह का संगीत किसी पौराणिक हिंदू महाकाव्य पर आधारित फिल्म के अनुकूल है।
इसी जारी चर्चा के बीच गीतकार मनोज मुंतशिर द्वारा अपनी पुरानी फिल्म ‘आदिपुरुष’ का एक गाना सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। कई लोगों ने उन पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया, वहीं एक समाचार चैनल ने यह सवाल भी उठा दिया कि क्या फिल्म ‘रामायण’ भी ‘आदिपुरुष’ की राह पर चल पड़ी है।
मनोज मुंतशिर ने इन आलोचनाओं और सवालों का कड़ा जवाब देते हुए अपने लिखे गीतों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा ‘आदिपुरुष’ के लिए लिखे गए गीत आज भी काफी लोकप्रिय हैं और अयोध्या में सुने जाते हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि कभी श्री अयोध्या जाकर सुनें, वहां की हर गली में केवल आदिपुरुष के ही गाने गूंजते हैं। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने भगवान राम के लिए कोई बच्चों की कविताएं या कव्वालियां नहीं लिखी थीं।’
आदिपुरुष’ के समय हुए भारी विरोध को याद करते हुए मुंतशिर ने कहा कि वे अपनी पुरानी गलतियों के लिए राम भक्तों से कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं और उन्हें विश्वास है कि भक्तों ने उन्हें क्षमा कर दिया है। हालांकि लगातार हो रही आलोचना से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने साफ किया कि वे नहीं चाहते कि उनके गानों को बार-बार किसी नए विवाद में घसीटा जाए। उन्होंने समाचार चैनल द्वारा ‘रामायण’ की तुलना ‘आदिपुरुष’ से करने पर भी कटाक्ष किया।
दूसरी तरफ, संगीतकार ए.आर. रहमान ने भी ‘मंगल रंग’ गाने को लेकर हो रही चर्चाओं पर अपनी बात रखी है। रहमान ने संकेत दिया कि इस प्रोजेक्ट पर इतनी कड़ी मेहनत करने के बाद अब उनके पास प्रतिक्रियाओं और आलोचनाओं पर लगातार ध्यान देने की ऊर्जा नहीं बची है। इन सबके बावजूद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर फिल्म के संगीत और उसकी प्रस्तुति को लेकर बहस लगातार जारी है।








