नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मणिपुर में शांति बहाल करने में विफल रहने, बड़े पैमाने पर विस्थापन और जवाबदेही के अभाव को लेकर तीखे सवाल किए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए खड़गे ने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य में जारी हिंसा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कानून-व्यवस्था बनाए रखने, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूर्ण विफलता का गंभीर प्रमाण है।
मणिपुर में हिंसा और बंद का माहौल
खड़गे की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मणिपुर में एक दिन पहले 45 वर्षीय कुकी व्यक्ति की हत्या के विरोध में बुलाए गए बंद के कारण कांगपोकपी जिला पूरी तरह ठप रहा। यह बंद इंफाल पूर्वी जिले में एक घात लगाकर किए गए हमले में तीन मैतेई लोगों की हत्या के विरोध में इंफाल घाटी में चल रहे दो दिवसीय शटडाउन के आखिरी दिन के साथ मेल खाता है।
पिछले कुछ महीनों में राज्य में कम से कम 50 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश मौतें नागा-कुकी झड़पों के दौरान हुईं। 13 जुलाई के बाद मैतेई और कुकी समुदायों के बीच यह पहला हिंसक संघर्ष था।
खड़गे के तीखे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से कई तीखे सवाल पूछे:
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शांति समिति का क्या हुआ?: खड़गे ने सवाल किया कि जून 2023 में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गठित शांति समिति की स्थिति क्या है? लोगों की सुरक्षा और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
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सुप्रीम कोर्ट की समिति की सिफारिशें: उन्होंने पूछा कि राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोगों की स्थिति सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिस गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई?
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विस्थापितों की दयनीय हालत: खड़गे ने सवाल उठाया, “सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत शिविरों में हुई अस्वाभाविक मौतों पर चिंता जताए जाने के बावजूद, आज भी हजारों लोग विस्थापन का दर्द झेलने को क्यों मजबूर हैं?”
बता दें कि सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDPs) के शिविरों में 34 अस्वाभाविक मौतों पर गहरी हैरानी जताई थी और आपराधिक मामले दर्ज न करने तथा पोस्टमार्टम न कराने पर राज्य की नाकामी पर सवाल उठाए थे।
‘300 से अधिक लोगों की गई जान’
मल्लिकार्जुन खड़गे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मई 2023 से अब तक 300 से अधिक बहुमूल्य जानें जा चुकी हैं, जबकि 24,530 लोग दयनीय स्थितियों में राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू होने और भाजपा नीत सरकार के लौटने के बाद भी राज्य में शांति बहाल नहीं हो पाई है।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “तीन साल से अधिक समय, 300 से ज्यादा मौतें, राष्ट्रपति शासन और मुख्यमंत्री बदलने के बाद, शासन की इस भारी-भरकम असफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा?” खड़गे ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे मणिपुर की सामरिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया बेहद निराशाजनक रही है। राज्य की सुरक्षा और स्थिरता को भाजपा की राजनीतिक विफलताओं की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।








