मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका वास्तव में क्षेत्र में शांति चाहता है तो उसे सबसे पहले तेल अवीव में बैठे अपने “पालतू” को नियंत्रित करना होगा। अराघची ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल की ओर से उकसावे वाली कार्रवाई जारी रही तो ईरान उसे ऐसा जवाब देगा जिसे वह लंबे समय तक याद रखेगा।
अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य गतिविधियों ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान का कहना है कि इजरायल लगातार क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है और उसे अमेरिका का राजनीतिक व सैन्य समर्थन प्राप्त है।
विदेश मंत्री अराघची ने अपने बयान में कहा कि यदि डोनाल्ड ट्रंप या अमेरिकी नेतृत्व वास्तव में किसी बड़े संघर्ष से बचना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले इजरायल को आक्रामक कदम उठाने से रोकना होगा। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी हमले या उकसावे का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा और देश अपनी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल की नीतियां पूरे क्षेत्र को युद्ध की ओर धकेल रही हैं। उनके मुताबिक, यदि तेल अवीव अपनी कार्रवाई नहीं रोकता है तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि उस पर हमला किया गया या उसके हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई तो जवाब निर्णायक होगा।
वहीं, अमेरिका और इजरायल की ओर से फिलहाल अराघची के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने और किसी बड़े सैन्य संघर्ष को रोकने के प्रयास कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ती बयानबाजी केवल कूटनीतिक तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान और इजरायल की अगली रणनीति पर टिकी हैं। कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जिस तरह के तीखे बयान दोनों पक्षों की ओर से सामने आ रहे हैं, उससे निकट भविष्य में हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं।








