पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में अमेरिका ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। अमेरिका की ओर से इजरायल और लेबनान के बीच संभावित शांति समझौते का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी किया गया है, जिसमें कई सख्त और अहम शर्तें शामिल हैं। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
प्रस्ताव के मुताबिक, लेबनान में सक्रिय सशस्त्र संगठन हिज्बुल्लाह को अपने हथियार छोड़ने होंगे और उसकी सैन्य गतिविधियों को समाप्त करना होगा। इसके बाद देश की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेबनानी सेना को सौंपने का प्रावधान किया गया है, जिसे पूरे देश में तैनात करने की बात कही गई है।
हिज्बुल्लाह पर सख्त शर्तें
ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि लेबनान की भूमि पर किसी भी गैर-राज्य सशस्त्र समूह को स्वतंत्र रूप से हथियार रखने या सैन्य गतिविधि चलाने की अनुमति नहीं होगी। हिज्बुल्लाह को मुख्य रूप से अपने हथियारों का नियंत्रण छोड़कर राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का विकल्प दिया जा सकता है, हालांकि इस पर अंतिम सहमति बाकी है।
लेबनान की सेना की भूमिका बढ़ेगी
समझौते के अनुसार, लेबनानी सेना को देश के भीतर कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा दोनों की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य पूरे देश में एकीकृत सुरक्षा ढांचा स्थापित करना और सभी सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर रोक लगाना बताया जा रहा है।
इजरायल-लेबनान सीमा पर असर की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से जारी सीमा तनाव में कमी आ सकती है। हालांकि, हिज्बुल्लाह की ओर से इस तरह की शर्तों का विरोध किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे समझौते पर बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल
अमेरिका की इस पहल को मध्य पूर्व में स्थिरता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि लेबनान, इजरायल और हिज्बुल्लाह इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं।
फिलहाल यह मसौदा शुरुआती चरण में है और इसे अंतिम समझौते में बदलने के लिए सभी पक्षों की सहमति जरूरी होगी। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कूटनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।








