नई दिल्ली। दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर दिसंबर से इंडिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिजाइन बिएननेल 2026 के प्रमुख आयोजन स्थलों में शामिल होगा। यहां 4 दिसंबर 2026 से 21 मार्च 2027 तक प्रदर्शनियों और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब केंद्र सरकार ने हाल ही में जंतर-मंतर के आसपास के क्षेत्र को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित स्थिति से हटा दिया है।
कला, वास्तुकला और डिजाइन पर केंद्रित इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का विस्तार इसके 2023 के पहले संस्करण की तुलना में अधिक व्यापक होगा। संस्कृति मंत्रालय की योजना के अनुसार, इस बार देशभर के साथ 20 से अधिक अन्य देशों की कला, वास्तुकला और डिजाइन से जुड़ी प्रस्तुतियों को मंच दिया जाएगा। कार्यक्रम के तहत एक दर्जन से अधिक ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शनियों तथा अन्य गतिविधियों का आयोजन प्रस्तावित है।
जंतर-मंतर को इस आयोजन के लिए चुना जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्थान लंबे समय से दिल्ली में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों तथा जनप्रदर्शनों के प्रमुख केंद्रों में रहा है। यहां श्रमिकों के अधिकारों, किसानों की समस्याओं, भ्रष्टाचार, सरकारी नीतियों और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर कई प्रदर्शन आयोजित किए जाते रहे हैं।
1724 में बना था ऐतिहासिक वेधशाला परिसर
जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने वर्ष 1724 में दिल्ली के जंतर-मंतर का निर्माण कराया था। यह 18वीं शताब्दी की खगोलीय वेधशाला है, जिसमें आकाशीय पिंडों की गति का अध्ययन करने और समय की गणना करने के लिए बड़े आकार के पत्थर और चिनाई से बने उपकरण स्थापित किए गए हैं।
मध्य दिल्ली में स्थित यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है। इसका ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और स्थापत्य महत्व इसे देश की प्रमुख विरासत संरचनाओं में स्थान दिलाता है।
समय के साथ जंतर-मंतर के आसपास का क्षेत्र जनआंदोलनों, ट्रेड यूनियनों, नागरिक संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों के लिए अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण स्थान बन गया। वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनों सहित कई चर्चित आंदोलनों ने इस स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
संसद और अन्य प्रमुख सरकारी संस्थानों के निकट होने के कारण भी यह स्थान संगठित जनप्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण रहा है।
प्रदर्शन और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच बहस
जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और निर्धारित प्रदर्शन स्थलों के उपयोग से संबंधित प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में यहां प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित स्थिति समाप्त करने के केंद्र सरकार के हालिया निर्णय ने इसके भविष्य के उपयोग को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं।
अब इसी ऐतिहासिक परिसर को एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन के प्रमुख स्थलों में शामिल किए जाने से इसकी भूमिका पर फिर ध्यान केंद्रित हुआ है। जहां एक ओर यह स्थान भारत की वैज्ञानिक और स्थापत्य विरासत का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह लंबे समय से नागरिकों की सामूहिक आवाज और विरोध प्रदर्शनों से भी जुड़ा रहा है।
2026 के आयोजन का दायरा होगा व्यापक
पहला इंडिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिजाइन बिएननेल वर्ष 2023 में लाल किले में आयोजित किया गया था। शुरुआती संस्करण की तुलना में 2026 के आयोजन को अधिक व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ तैयार किया जा रहा है।
चार दिसंबर से शुरू होकर 21 मार्च 2027 तक चलने वाले इस आयोजन में जंतर-मंतर की भागीदारी से ऐतिहासिक स्मारकों को कला और डिजाइन की समकालीन प्रस्तुतियों से जोड़ने का प्रयास होगा। यह आयोजन ऐसे स्थल को भी नई सांस्कृतिक पहचान देगा, जिसकी ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ दिल्ली के जनआंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।








