भारतीय टेनिस के प्रशासन में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम घटनाक्रम सामने आया है। देश की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा और पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी महेश भूपति ने अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के असाधारण योग्यता वाले खिलाड़ियों की श्रेणी के चुनावों के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। दोनों का लक्ष्य महासभा और कार्यकारी समिति में खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। हालांकि, भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने इन चुनावों के लिए नामांकन नहीं भरा है। इसके चलते उनके एआईटीए अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने की संभावनाएं समाप्त हो गई हैं।
लिएंडर पेस को बंगाल टेनिस संघ ने सार्वजनिक रूप से एआईटीए अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के तौर पर समर्थन दिया था। इसके बावजूद चुनावी प्रक्रिया में उनकी दावेदारी आगे नहीं बढ़ सकी। पेस उन 40 खिलाड़ियों की सूची में टियर-1 श्रेणी में शामिल एकमात्र खिलाड़ी हैं, लेकिन असाधारण योग्यता वाले खिलाड़ियों के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं करने के कारण वह अध्यक्ष पद के लिए आवश्यक पात्रता हासिल नहीं कर पाए। मौजूदा नियमों के अनुसार, पेस राज्य प्रतिनिधि के तौर पर भी चुनाव लड़ने के पात्र नहीं हैं। वह 27 नवंबर को होने वाले एआईटीए चुनावों में बंगाल के प्रतिनिधि के रूप में भाग ले सकते हैं, लेकिन संशोधित संविधान के प्रावधानों के तहत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे।
एआईटीए के संशोधित संविधान के नियम 12(बी) में अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव लड़ने की पात्रता स्पष्ट की गई है। इसके तहत किसी व्यक्ति को इन पदों के लिए उम्मीदवार बनने के लिए तीन में से कम से कम एक शर्त पूरी करनी होगी। पहली शर्त यह है कि वह असाधारण योग्यता वाले खिलाड़ियों की महासभा का प्रतिनिधि हो। दूसरी शर्त के मुताबिक, वह पहले एआईटीए की कार्यकारी समिति में किसी पद पर कम से कम एक पूरा कार्यकाल पूरा कर चुका हो। तीसरी शर्त यह है कि वह किसी राज्य संबद्ध टेनिस इकाई में अध्यक्ष, महासचिव या कोषाध्यक्ष के पद पर रह चुका हो। इन्हीं प्रावधानों के आधार पर शीर्ष पदों के लिए उम्मीदवारों की पात्रता तय की जाएगी।
महेश भूपति ने टेनिस प्रशासन में अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रत्येक खेल महासंघ में ऐसे खिलाड़ियों का होना जरूरी है, जिन्होंने उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा की हो और जिन्हें खेल की चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव हो। उनके मुताबिक, ऐसे खिलाड़ी खेल व्यवस्था में जरूरी बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं। भूपति ने बैडमिंटन का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलेला गोपीचंद ने इस खेल में बदलाव लाने और उसे नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि इसी तरह अनुभवी खिलाड़ियों की भागीदारी टेनिस के विकास में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
नामांकन सूची में सानिया मिर्जा और महेश भूपति के अलावा छह अन्य पूर्व खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें अंकिता भांबरी, भारत के मौजूदा डेविस कप कोच आशुतोष सिंह, गौरव नाटेकर, जानकी कृष्णमूर्ति, शालिनी ठाकुर चावला और मौजूदा बिली जीन किंग कप कप्तान विशाल उप्पल शामिल हैं। इन सभी ने असाधारण योग्यता वाले खिलाड़ियों की श्रेणी में अपनी दावेदारी पेश की है। वहीं, कार्यकारी समिति के लिए पांच उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। इस सूची में महेश भूपति, सानिया मिर्जा, अंकिता भांबरी, जानकी कृष्णमूर्ति और विशाल उप्पल के नाम शामिल हैं।
एआईटीए के संशोधित संविधान के तहत महासभा में असाधारण योग्यता वाले खिलाड़ियों के लिए चार प्रतिनिधियों का प्रावधान किया गया है, जिनमें दो पुरुष और दो महिलाएं होंगी। इसके अतिरिक्त, 15 सदस्यीय कार्यकारी समिति में इस श्रेणी के दो प्रतिनिधियों को जगह दी जाएगी, जिनमें एक पुरुष और एक महिला शामिल होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य खेल प्रशासन में उन खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है और अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई है। राष्ट्रीय खेल महासंघों के संचालन में खिलाड़ियों की भूमिका बढ़ाने के व्यापक प्रयासों के तहत इस व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महेश भूपति भारतीय टेनिस के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। वह युगल वर्ग में विश्व के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी रह चुके हैं और उन्होंने अपने करियर में कई ग्रैंडस्लैम खिताब जीते हैं। दूसरी ओर, सानिया मिर्जा भी युगल वर्ग में विश्व की शीर्ष खिलाड़ी रह चुकी हैं। उन्होंने महिला युगल और मिश्रित युगल प्रतियोगिताओं में कुल छह ग्रैंडस्लैम खिताब अपने नाम किए। अंतरराष्ट्रीय टेनिस में शानदार उपलब्धियों के कारण दोनों खिलाड़ियों ने भारतीय खेल जगत में विशिष्ट पहचान बनाई है। अब एआईटीए के चुनावों में उनकी भागीदारी से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनुभवी खिलाड़ियों को संगठन के प्रशासन में कितनी भूमिका मिलती है।








