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April 17, 2026 10:37 pm

श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय में सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह के तहत जल संरक्षण पर प्रभावशाली संगोष्ठी

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इंदौर, 17 अप्रैल 2026 – श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सीईएसडी) द्वारा “जिम्मी मगिलिगन स्मृति सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह” के अंतर्गत आज 17 अप्रैल 2026 को “मानव जिम्मेदारी: लोगों और पृथ्वी के सतत विकास के लिए जल का उपयोग” विषय पर एक अत्यंत प्रेरणादायक विशेष संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम 15 से 21 अप्रैल 2026 तक चल रहे “जिम्मी मगिलिगन स्मृति सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह” का हिस्सा था, जिसका मूल भाव “छोटे परिवर्तन, बड़ा प्रभाव – जल बचाएं” था।

कुलपति डॉ. योगेश सी. गोस्वामी के मार्गदर्शन में आयोजित

कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय कुलपति प्रोफेसर डॉ. योगेश सी. गोस्वामी के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने सतत विकास के मूल सिद्धांतों और जल के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

मुख्य वक्ताओं के प्रेरणादायक उद्बोधन

  • पद्मश्री डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन (निदेशक, जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट, इंदौर) डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि 16 वर्ष की आयु से ही जल संरक्षण की जागरूकता उनके जीवन का हिस्सा बन गई थी। उन्होंने पति श्री जिम्मी मगिलिगन के साथ 25 वर्षों तक बरली विकास संस्थान में 6000 आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाने, सोलर किचन, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और सस्टेनेबल विकास के कार्यों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जिम्मी जी ने 1998 में मध्य भारत का सबसे बड़ा सोलर कम्युनिटी किचन स्थापित किया, जो आज भी 150 लोगों का भोजन बनाता है।
  • प्रख्यात भूवैज्ञानिक एवं भूजल वैज्ञानिक श्री सुधीन्द्र मोहन शर्मा श्री शर्मा ने जल संरक्षण को अत्यंत रोचक और व्यावहारिक उदाहरणों से समझाया। उन्होंने फिल्म “गीत गाता चल” और “ब्लू गोल्ड” का जिक्र करते हुए जल संकट को वैश्विक समस्या बताया। उन्होंने 7R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle, Recharge, Restore, Rejuvenate, Respect) पर विस्तार से चर्चा की और प्राचीन भारत की जल संरक्षण परंपरा (मोढेरा सूर्य मंदिर, जोधपुर के तूरजी के झालरे) का उदाहरण दिया।

कार्यक्रम का संदेश

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अंत में प्रेरणादायक संदेश दिया कि

“अपने आप विश्व का कल्याण नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के प्रयासों से ही यह संभव है।”

कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं समन्वयन डॉ. उत्तम शर्मा (समन्वयक) एवं डॉ. श्वेता अग्रवाल (सह-समन्वयक) द्वारा किया गया।

यह संगोष्ठी विद्यार्थियों, शिक्षकों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए जल संरक्षण और सस्टेनेबल लिविंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

Reporter

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