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April 16, 2026 5:24 am

डिजिटल जागरूकता से साइबर ठगी पर लगाम

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गृह मंत्रीलय ने बहुते सहका अपराध के चलते सभी विभागों और बैंकिंगसानों को संयुत रूप से मिलकर कार्य करने के निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती एजेंसी समन्वय पर जोर दिया है। उन्होंने केंद्रीय अन्वेषणव्यूरोनाईयो, एसआरईडी और बैंकिंग संस्थानों को मिलकर समन्वित और आयंत सुरक्षित विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि नई तकनीकों का उपयोग कर उगणी करने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। देश में डिजिटल लेन-देन की तेज रफतार अवसरों के साथ जोखिम भी बढ़ाए है और और 37 सेकांड में एक व्यकि साइबर फाँड का शिकार हो रहा है यानी लगभग हर पी 100 लोग प्रभावित हो रहे हैं। गृह मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में लिखित में दी गई जानकारी में बताया कि 2021 में 2015 के बीच साइबा फाँड करने वाले अपराधियों के लोगों के सातों में 55,000 करोड़ से ज्यादा की रकम उड़ाई है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, पिछले पांच सालों में कुल 6 बरोड़ 58 लाख शिकायतें साइका ठगी से जुड़ी दर्ज हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि 2021 में साइबर ठगी की राशि 551 करोड़ थी, जो 2022 में 2,290 करोड़ और 2025 में 7.465 करोड़ तक पहुंच गई। साल 2024 में यह बढ़कर 22.848 करोड़ हो गई और 2025 में 22,495 करोड़ दर्ज की गई। शिकायतों की संख्या भी लगातार बही है। 2021 में 2,62,846, 2022 में 6,94,446, 2023 में 13,10,357, 2024 में 19,18.835 और 2025 में 24,02,579 दर्ज हुई। यह वृद्धि कंपात आंकड़ों की कि डिजिटल सुरक्षा के सामने खड़ी व्यापक चुनौती कर सकत है।

हालांकि इन चुनीतियों के बीच की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सरकार पर विर्य के लिए संस्थागत छर्चि को करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। सीबीआई में नई साइबर अपराध शाखा की शुरुआत और आईभी के राज्य साइबर अपराध समय केंद्र शर्ट का शुभारंभ इसी का हिस्सा है। 2025 में इसके से करोड़ की राशि उपी होने से बनाई गई। जनवरी, 2020 में नवंबर 2025 के बीच राष्ट्रीय साका अपराध रिपोटिंग तंत्र पर 23 करोड़ से अधिक बार विजा दर्ज हुए और 82 लाख शिकायतें दर्ज की गई, जिनमें से लगभग 1.84 लाख मामलों को एफआईआर में परिवर्तित किया गया। वित्तीय उपरत्वरित रीक के लिए सिटीजन पारिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया, जबकि पलाइन 1000 सहायता का

माध्यम बनी है। राज्यवार परिदृश्य भी चिंकअनुसार महारा कर्नाटक और तेलंगाना अपराध के मामलों में शीर्ष पर हैं।

गृह मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में लिखित में दी गई जानकारी में बताया कि 2021 से 2025 के बीच साइबर फॉड करने वाले अपराधियों ने लोगों के खातों से 55,000 करोड़ से ज्यादा की रकम उड़ाई है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, पिछले पांच सालों में कुल 6 करोड़ 58 लाख शिकायतें साइबर ठगी से जुड़ी दर्ज हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि 2021 में साइबर ठगी की राशि 551 करोड़ थी, जो 2022 में 2,290 करोड़ और 2023 में 7,465 करोड़ तक पहुंच गई। साल 2024 में यह बढ़कर 22,848 करोड़ हो गई और 2025 में 22,495 करोड़ दर्ज की गई। शिकायतों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।

प्रदेश और राजस्थान भी प्रमुख राज्यों में शामिल हैं। राणा का दूर झारखंड का जामताड़ा और बिहार के कुछ इलाके लंबे समय से साइबर अपराध के डॉरपॉट याने जाते रहे हैं। के अध्ययनों में राजस्थान का भरतपुर जित्ता साइकर उगी का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जिसने जामताड़ा को पीछे सोड़ दिया है। भरतपुर अलबर मुंह और मधुरा क्षेत्र मिलकर देश के साइबर असाधों का कड़ा हिस्सा प्रभावित करते हैं। 2025 में में 786 करोड़ से अधिक को साकर उगी दर्ज की गई और पुलिस ने 2.5 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबर तक किए। बागिरीदों की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैल है। वहीं जांच को सुदृड़ बचाने के लिए नेशनल डिजिटात सपोर्ट सेंदर राज्यों को तकनीकों सहयोग दे रखा है। नई विस्थित केंद्र दिसंबर, 2025 तक 13.299 मामलों में सहायता प्रदान की है, जबकि

असम में भी आधुनिक प्रयोगशाला है।राज्यों को फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के उनमें केंद्र सहयोग दे रहा है ताकि डिजिटल माध्यऔर प्रभावी विश्लेषित किए जा सकें। रिषइम रिपोर्टिगरमिक नेटवर्क अनुसंधान, क्षमता निर्माण और जन-जागरुकता पर समानांतर रूप से कार्य किया है। दिरित क्रांति ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में इजाफा होने के साथ ही साइबर क्राइम का भी तेजी से कहा है। ऑनलाइन बैंकिंग ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान ने आर्थिक गतिविधियों को सरल बना है परंतु इसके साथ ही माइजर जोखिम भी बड़े हैं।उमा पेंड्याला

असल में साइबर विशेषज्ञ व सिक्योरआईज़ अपराधका का विषय नहीं रहा बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा मुछ बन चुका है। समानता के ब सकर उप रोजाना नई तबाजी कर लगाकर लोगों को ठगी का शिकार रहे हैं। है कि पड़े-लिखे और समझदार व्यक्ति भी इनकी तपी के जाल में फंसते जा हैं। यहीं नहीं, साइबर उसकी और कोर्बोडिया से ट्रेनिंग लेकर भारत भाते हैं और उगी को अंजाम देते हैं। गिरीर फेक इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग स्कैम एआई-आधारित सोशल इंजीनियरिंग और औषक डिजिटल ओस्ट गेमिंग टाक, रेलीग्राम स्कैम क्रेडिट कार्ड तिमिर बढ़ाने, फर्जी बाहन चालान, शादी कार्ड के जरिए कर रहे हैं। अब ती बिजली बिल को ठगों ने फर्जी एलपीजी डॉलरशिपनी भी जगी का जरिया बस लिया है।

जान साइबर ठगी से बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की मजबूत और अलग-अलग साइबर विशेषज्ञ व सिक्योरआईज़ की बिजनेस ऑपरेशंस की हेड उमा पेंड्याला का पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए और उन्हें समय-समय पर बाते रहना चाहिए। किमी भी ईमेल, एसएमएस वा सोशल मीडिया लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए, क्योंकि फिटिंग हमलों का माध्यम हो सकते हैं। बैंक, सरकारी अधिकारी या कोई भी वैध संस्था फोन गर करें कई काकर समय सावधानी बरतें और संवेदनशील लेन-देन से बचें। अपने मोबाइल सिक्योरआईज़ लैपटॉप और कोयूटर में वर्षविनासॉफ्टवेयर इंस्टॉल रखें और सिस्टम अपडेट नियमित रूप से करें। लुभावने ऑफर लॉटरी या निवेशीजाओं के नाम पर आने वाले कॉल और संदेशों से सतर्क रहें। यदि कोई सवयं को पुलिस या एजेंसी बताकर ऑनलाइन गिरफ्तारी की धमकी है, तो कराएं नहीं और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करें। किसी भी प्रकार की उपो इन्वेस्टिगेशनका दिने पर 1930 कति कधिकारिक साका अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें

Uma Pendyala,

Head Business Operations, SecurEyes

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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