इस्लामाबाद: भारत में हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) प्रदर्शन को लेकर पाकिस्तान के मीडिया चैनलों और राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच एक पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषक (एक्सपर्ट) ने अपने ही देश के मीडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि भारत के आंतरिक घटनाक्रम पर घंटों बहस की जाती है, लेकिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और वहां के स्थानीय मुद्दों पर उतनी गंभीर चर्चा क्यों नहीं होती।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने एक टीवी चर्चा के दौरान कहा कि मीडिया को केवल पड़ोसी देश की खबरों पर केंद्रित रहने के बजाय अपने देश और उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों की समस्याओं पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि यदि पत्रकारिता का उद्देश्य लोगों तक वास्तविक और संतुलित जानकारी पहुंचाना है, तो घरेलू मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में किसी भी राजनीतिक या सामाजिक घटनाक्रम को पाकिस्तान के कई टीवी चैनलों पर लंबे समय तक प्रमुखता से दिखाया जाता है, जबकि POK से जुड़े विकास, जनसुविधाओं, स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की समस्याओं पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई।
भारत में CJP प्रदर्शन को लेकर पाकिस्तान के कई समाचार चैनलों ने विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए और राजनीतिक विश्लेषण पेश किए। हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि किसी भी मीडिया संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने देश के नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देना होनी चाहिए।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव बना हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के मीडिया में एक-दूसरे से जुड़ी खबरों को अक्सर प्रमुखता मिलती है। हालांकि, मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित पत्रकारिता के लिए अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के साथ-साथ स्थानीय और जनहित से जुड़े विषयों को भी पर्याप्त स्थान मिलना आवश्यक है।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि घरेलू मुद्दों पर अधिक चर्चा होनी चाहिए, जबकि कुछ अन्य लोगों ने अलग राय व्यक्त की।
फिलहाल, यह बयान पाकिस्तान के मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। दोनों देशों के बीच जारी राजनीतिक माहौल के बीच मीडिया की भूमिका को लेकर यह बहस एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।








