पटना: बिहार में लगातार बढ़ रहे नदियों के जलस्तर ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों के निचले और दियारा इलाकों में पानी फैलने लगा है। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
पटना में गंगा ने बढ़ाई चिंता
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार सुबह जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गांधी घाट पर गंगा का पानी 50.53 मीटर तक पहुंच गया, जो निर्धारित उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर से करीब एक सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले चार घंटों में जलस्तर में करीब 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अधिकारियों ने अनुमान जताया है कि जलस्तर आगे भी बढ़ सकता है। ऐसे में पटना के निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
कई जिलों में बाढ़ का असर
बिहार सरकार के अनुसार, बाढ़ से राज्य के कई हिस्से प्रभावित हैं। पटना, भोजपुर, भागलपुर, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, कटिहार समेत कई जिलों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। निचले इलाकों में नदी का पानी फैलने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
पटना जिले के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति सामने आई है। वहीं दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नदी के बढ़ते जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
गंगा समेत कई नदियां उफान पर
बिहार में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि कई दूसरी नदियों का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लगातार बारिश और पड़ोसी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण स्थिति और संवेदनशील बनी हुई है।
जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन नदी के जलस्तर तथा तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
33 रेस्क्यू टीमें तैनात
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 NDRF और 27 SDRF टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। इसके अलावा करीब 693 सरकारी नावों का इस्तेमाल राहत, बचाव और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरतमंद परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई चलाने की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों की पहचान कर उन्हें तत्काल जरूरी सहायता उपलब्ध कराने और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
तटबंधों पर विशेष निगरानी
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटबंधों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को नदी के किनारे और तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
पटना में शहर की सुरक्षा के लिए बनाए गए सुरक्षा तंत्र पर भी प्रशासन नजर रख रहा है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि नदी का पानी आबादी वाले हिस्सों में ज्यादा न फैल पाए और किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दल तुरंत कार्रवाई कर सकें।
नेपाल और आसपास की बारिश का भी असर
बिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति के पीछे बिहार के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश को भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। नेपाल और झारखंड में हुई बारिश के बाद कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी गई है। इसका असर बिहार के नदी तंत्र पर पड़ा है।
मौसम और नदी के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए आने वाले समय में भी प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।
लोगों से प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नदी किनारे, दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को बाढ़ के पानी के आसपास जाने से रोकने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत टीमों से संपर्क करने की अपील की गई है।
फिलहाल कैसी है स्थिति?
बिहार में बाढ़ की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, लेकिन प्रशासन राहत और बचाव के लिए लगातार काम कर रहा है। पटना में गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर के पार पहुंचने के बाद निचले इलाकों पर खतरा बढ़ गया है। कई जिलों में नदियां उफान पर हैं और राहत-बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है।
आने वाले घंटों में नदी का जलस्तर और बारिश की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित आबादी को समय रहते सहायता मिले और किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां मौजूद रहें।








