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August 20, 2026 3:01 pm

खाने की आदतों में बदलाव: फ़ूड डिवोर्स का नया ट्रेंड, कपल्स अब अलग-अलग क्यों खा रहे हैं?

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 रिश्तों में प्यार, विश्वास और समझ के साथ-साथ अब खाने की आदतें भी बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही हैं। एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, जिसे ‘फ़ूड डिवोर्स’ कहा जा रहा है। इसका मतलब पार्टनर से तलाक लेना नहीं है, बल्कि खाने-पीने से जुड़े फैसलों को एक-दूसरे से अलग कर लेना है। कई कपल्स अब एक ही घर में रहते हुए भी अपनी किराने की खरीदारी अलग कर रहे हैं, अलग-अलग खाना बना रहे हैं और अलग समय पर भोजन कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कपल्स एक साथ खाना क्यों छोड़ रहे हैं?

क्या है फ़ूड डिवोर्स?

फ़ूड डिवोर्स एक ऐसा आधुनिक रिलेशनशिप ट्रेंड है जिसमें पति-पत्नी या पार्टनर खाने को लेकर समझौता करने की बजाय अपनी व्यक्तिगत पसंद, स्वास्थ्य जरूरतों और समय के हिसाब से भोजन करते हैं। एक पार्टनर हाई-प्रोटीन डाइट या वेट लॉस प्लान पर हो सकता है, तो दूसरा पारंपरिक घर के खाने या जंक फूड का शौकीन। दोनों अपनी-अपनी रसोई की व्यवस्था करते हैं, अलग मेन्यू तय करते हैं और कई बार एक साथ टेबल पर भी नहीं बैठते।

यह ट्रेंड खासकर उन कपल्स में दिख रहा है जो फिटनेस को लेकर जागरूक हैं या जिनकी दिनचर्या बेहद व्यस्त है। यूके और अमेरिका में इस पर काफी चर्चा हुई, अब भारत में भी वर्किंग कपल्स और युवा जोड़े इसे अपना रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

एक्सपर्ट्स और कपल्स के अनुभवों के अनुसार फ़ूड डिवोर्स के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं:

  • अलग-अलग डाइट और फिटनेस लक्ष्य: एक पार्टनर वजन कम करने, मसल बनाने या किसी खास डाइट (कीटो, वीगन, ग्लूटेन-फ्री) पर होता है, जबकि दूसरे की पसंद बिल्कुल अलग होती है। एक ही खाना बनाने से दोनों में से किसी एक को समझौता करना पड़ता है।
  • व्यस्त और अलग शेड्यूल: ऑफिस टाइम, वर्क-फ्रॉम-होम या अलग-अलग शिफ्ट की वजह से दोनों का खाने का समय मेल नहीं खाता। एक जल्दी खा लेता है तो दूसरा देर से।
  • वेट लॉस दवाओं का प्रभाव: ओजेम्पिक, मौंजारो जैसी GLP-1 दवाओं के इस्तेमाल से कई लोगों की भूख और स्वाद में बदलाव आ गया है। ऐसे में एक साथ खाने का आनंद कम हो जाता है।
  • फूड एलर्जी और सेहत की जरूरतें: एलर्जी, एसिडिटी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण एक जैसा खाना संभव नहीं हो पाता।
  • रोजाना की बहस से बचाव: ‘आज क्या बनाएं’ या ‘मुझे यह पसंद नहीं’ जैसी छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवाद से बचने के लिए कई कपल्स यह रास्ता अपना रहे हैं।

क्या यह रिश्ते के लिए फायदेमंद है?

कुछ कपल्स का कहना है कि फ़ूड डिवोर्स अपनाने के बाद घर का माहौल शांत हो गया है। खाने को लेकर तनाव खत्म होने से बाकी रिश्ते में सुधार आया है। हर किसी को अपनी पसंद का खाना मिलता है और समय की बचत भी होती है।

वहीं रिलेशनशिप काउंसलर्स थोड़ी सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि नियमित रूप से एक साथ भोजन करना भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाता है। बातचीत का मौका मिलता है और रिश्ते में नजदीकी बनी रहती है। अगर पूरी तरह अलग-अलग खाने का सिलसिला लंबा खिंच जाए तो दूरी बढ़ने का खतरा भी हो सकता है। इसलिए कई एक्सपर्ट सुझाव देते हैं कि हफ्ते में कम से कम दो-तीन बार एक साथ जरूर खाएं।

भारतीय परिवारों में कैसे दिख रहा है यह बदलाव?

भारत में संयुक्त परिवार की परंपरा रही है, जहां सब एक साथ खाना खाते थे। लेकिन शहरों में रहने वाले न्यूक्लियर परिवार और वर्किंग कपल्स अब अपनी सुविधा के हिसाब से फैसले ले रहे हैं। कई जोड़े वीकेंड पर एक साथ खाना बनाते और खाते हैं, लेकिन वीकडे में अपनी-अपनी डाइट फॉलो करते हैं। कुछ परिवारों में यह बच्चों की पसंद-नापसंद को ध्यान में रखते हुए भी अपनाया जा रहा है।

फ़ूड डिवोर्स आधुनिक जीवन की व्यस्तता, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और व्यक्तिगत आजादी का प्रतीक बनता जा रहा है। चाहे आप इसे अपनाएं या पारंपरिक तरीके से एक साथ खाना पसंद करें, लेकिन यह साफ है कि खाने की आदतें अब सिर्फ पेट भरने का माध्यम नहीं रहीं। वे रिश्तों की गुणवत्ता और व्यक्तिगत संतुष्टि को भी प्रभावित कर रही हैं।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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