बेंगलुरु। कर्नाटक में भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी की 10 दिवसीय पदयात्रा मंगलवार को रायचूर जिले के लिंगसुगुर से शुरू हुई, जो करीब 175 किलोमीटर का सफर तय करेगी और 10 सितंबर को बल्लारी में समाप्त होगी। इस पदयात्रा से राज्य की सियासत गर्मा गई है और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए चुनौती बढ़ गई है।
पदयात्रा का मकसद
भाजपा राज्य अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र के नेतृत्व में शुरू हुई इस पदयात्रा को ‘बल्लारी चलो’ नाम दिया गया है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार, सूखे की समस्या, सरकारी भर्तियों में देरी और दलित-आदिवासी हितों की अनदेखी कर रही है। पदयात्रा में वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले, केपीएससी भर्ती घोटाले, एससी-एसटी फंड के दुरुपयोग और सूखा प्रबंधन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह पदयात्रा सिर्फ एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की कई नाकामियों के खिलाफ जनजागरूक अभियान है। पार्टी इसे 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले लंबे संघर्ष का पहला चरण मान रही है।
मार्ग और भागीदारी
पदयात्रा लिंगसुगुर से शुरू होकर मास्की, सिंधनूर, कनकगिरी, गंगावती, कम्पली, संदुर और बल्लारी ग्रामीण होते हुए बल्लारी शहर में समाप्त होगी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, आर अशोक, चालवड़ी नारायणस्वामी समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। पार्टी का दावा है कि इसमें 30 हजार से अधिक लोग भाग लेंगे।
शिवकुमार की चुनौती
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पदयात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा के ऐसे कार्यक्रम कांग्रेस को जवाब देने का मौका देते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी जवाबी रणनीति बनाएगी। हालांकि, विपक्ष के इस बड़े अभियान से सत्ताधारी कांग्रेस पर दबाव बढ़ने की संभावना है, खासकर उत्तर कर्नाटक के क्षेत्रों में जहां भाजपा की पकड़ मजबूत मानी जाती है।
भाजपा का आरोप है कि सरकार सूखे की स्थिति और 2.5 लाख खाली पदों को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक स्टंट बता रही है।
इस पदयात्रा से कर्नाटक की सियासत में नया मोड़ आने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि 10 दिन के इस सफर में भाजपा कितना जनसमर्थन जुटा पाती है और कांग्रेस सरकार इसे कैसे काउंटर करती है।








