बिहार के लखीसराय जिले में NEET परीक्षा के दौरान बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें परीक्षार्थी, कथित सॉल्वर, तकनीकी स्टाफ और कुछ मेडिकल छात्रों के शामिल होने की बात सामने आई है। इस घटना के बाद पूरे परीक्षा तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी के दौरान यह सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों की जगह पर दूसरे लोग परीक्षा देने पहुंचे थे। शुरुआती जांच में यह मामला एक संगठित “सॉल्वर रैकेट” से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जो पैसे लेकर या मिलीभगत से डमी कैंडिडेट्स को परीक्षा में बैठाने का काम कर रहा था।
AIIMS, BHU और दिल्ली के मेडिकल छात्रों पर शक
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में देश के कुछ प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के छात्रों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इनमें AIIMS, BHU और दिल्ली स्थित मेडिकल कॉलेजों के MBBS और अन्य मेडिकल छात्रों के नाम सामने आने की चर्चा है। आरोप है कि इन छात्रों ने पैसे लेकर या नेटवर्क के दबाव में आकर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दी।
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है और अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
कैसे हुआ खुलासा?
परीक्षा केंद्रों पर नियमित जांच के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की पहचान और बायोमेट्रिक मिलान में गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद केंद्रों पर तैनात अधिकारियों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। छापेमारी के दौरान कई संदिग्ध लोगों को मौके से हिरासत में लिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े में कुछ तकनीकी स्टाफ और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है।
30 लोगों की गिरफ्तारी, नेटवर्क की जांच जारी
प्रशासन के अनुसार, अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें परीक्षार्थी, डमी कैंडिडेट्स, एजेंट और कुछ सहयोगी शामिल हैं। पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज कर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए जांच तेज कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ कुछ व्यक्तियों का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह हो सकता है जो अलग-अलग राज्यों में सक्रिय है।
परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों और अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय करती हैं, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।
प्रशासन की सख्ती
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस पूरे रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को ट्रेस करने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
निष्कर्ष: लखीसराय में सामने आया यह मामला NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में गंभीर सुरक्षा चूक और संगठित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है, जिसकी जांच अब कई स्तरों पर जारी है।








