नई दिल्ली: भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू औद्योगिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम समझौता सामने आया है। अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के बीच पांच साल की साझेदारी हुई है। यह समझौता भारत में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पांच साल की साझेदारी से क्या बदलेगा?
इस समझौते के तहत दोनों कंपनियों के बीच दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग रहेगा। इसका व्यापक उद्देश्य भारत में रक्षा उत्पादन से जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूत करना और घरेलू स्तर पर उपलब्ध क्षमताओं का विस्तार करना है।
IRRPL भारत-रूस संयुक्त उद्यम है, जिसकी स्थापना भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इसका विनिर्माण केंद्र उत्तर प्रदेश के अमेठी के कोरवा में है।
अमेठी बना रक्षा निर्माण का अहम केंद्र
अमेठी के कोरवा स्थित IRRPL परिसर में रक्षा उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं। हाल ही में कंपनी ने पूरी तरह भारतीय कलपुर्जों और इनपुट सामग्री से तैयार AK-203 के एक प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण भी किया है। कंपनी के अनुसार यह उसके उत्पादन में पूर्ण स्वदेशीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
इस उपलब्धि से यह संकेत मिलता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में केवल तैयार उत्पादों की खरीद तक सीमित रहने के बजाय घरेलू विनिर्माण और सप्लायर नेटवर्क विकसित करने पर भी जोर दे रहा है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रक्षा मंत्रालय पहले भी IRRPL के जरिए भारत में AK-203 के स्वदेशी उत्पादन को आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता चुका है।
नई साझेदारी को इसी व्यापक औद्योगिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा सकता है। इससे घरेलू कंपनियों के बीच सहयोग, तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आगे क्या?
अब इस साझेदारी के जरिए घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को और मजबूत करने पर ध्यान रहेगा। वहीं, अमेठी में पूरी तरह स्वदेशी उत्पादन की दिशा में हुई प्रगति के बाद आने वाले समय में भारतीय रक्षा उद्योग के लिए स्थानीय सप्लायर नेटवर्क और उत्पादन क्षमता का विस्तार अहम रहेगा।
कुल मिलाकर, अडाणी डिफेंस और IRRPL की पांच साल की साझेदारी भारत के रक्षा उद्योग में घरेलू उत्पादन, स्वदेशी सप्लाई चेन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कदम के रूप में सामने आई है।








