रामपुर । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद आजम खान की कानूनी मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोहरे पैन कार्ड मामले में राहत और जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम जैसे ही वे रामपुर जिला जेल से बाहर आए, परिसर के ठीक बाहर पहले से मुस्तैद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में अपनी हिरासत में ले लिया। हालांकि, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान जमानत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपने घर रवाना हो गए। रिहाई की उम्मीद में जेल के बाहर घंटों से एकत्र सपा समर्थकों की खुशी पल भर में काफूर हो गई और इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद पूरे रामपुर क्षेत्र में व्यापक राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
जांच एजेंसी की यह त्वरित कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की तफ्तीश के संदर्भ में की गई है। जेल प्रशासन की ओर से रिहाई की औपचारिकताएं पूरी होते ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों के साथ पहुंचे ईडी अधिकारियों ने आजम खान को नया वारंट थमा दिया और पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों का तर्क है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल हुए संदिग्ध कोष और कथित अनियमतताओं के गंभीर आरोपों की गहराई से जांच के लिए आजम खान की हिरासत आवश्यक है। एजेंसी उन्हें गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी की मांग करेगी।
आजम खान की दोबारा हिरासत की खबर सामने आते ही रामपुर जेल परिसर के बाहर मौजूद समाजवादी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आक्रोश फूट पड़ा। समर्थकों ने जांच एजेंसियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस कदम को राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित बताया। शहर में बिगड़ती स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन ने जेल के आसपास के इलाकों, प्रमुख मुख्य मार्गों और संवेदनशील चौराहों पर भारी संख्या में पुलिस बल तथा पीएसी के जवानों की तैनाती कर दी है, ताकि शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
इस ताजा घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय पदाधिकारियों ने कड़ा विरोध जताया है। सपा प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि जब भी किसी मामले में न्यायालय से विपक्ष के नेताओं को राहत या जमानत मिलती है, तब सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर उन्हें दोबारा निशाना बनाया जाता है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देश की स्वतंत्र जांच एजेंसियां केवल तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के आधार पर काम कर रही हैं और भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।








