चुनावी राजनीति में दल-बदल को लेकर Association for Democratic Reforms (ADR) की नई रिपोर्ट में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। ADR और National Election Watch ने 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद अपनी राजनीतिक पार्टी बदलने वाले मौजूदा सांसदों और विधायकों का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में कुल 111 सांसद और विधायक ऐसे रहे जिन्होंने चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदली। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं।
111 जनप्रतिनिधियों ने बदली राजनीतिक पार्टी
ADR की रिपोर्ट के अनुसार, यह विश्लेषण 2022 से 2026 के बीच हुए लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा चुनावों तथा इस दौरान हुए उपचुनावों से जुड़े मामलों पर आधारित है।
रिपोर्ट में पार्टी बदलने के मामलों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें बिना सदन से इस्तीफा दिए पार्टी बदलना, पार्टी का विलय, इस्तीफा देने के बाद दूसरी पार्टी में शामिल होकर उपचुनाव लड़ना और अयोग्य ठहराए जाने के बाद दूसरी पार्टी में शामिल होकर उपचुनाव जीतना शामिल है।
ADR ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के व्यवस्थित रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सूची पूरी तरह exhaustive होने की गारंटी नहीं देती। यानी कुछ अन्य मामले इसमें शामिल नहीं हो पाए हो सकते हैं।
NPF में पहुंचे सबसे ज्यादा 32 नेता
ADR के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी पार्टियों से सबसे ज्यादा 32 सांसद-विधायक NPF में शामिल हुए। यह कुल 111 मामलों का करीब 29 फीसदी है।
इसके बाद BJP में 29 सांसद-विधायक शामिल हुए, जो करीब 26 फीसदी हैं। वहीं Nationalist Citizens Party of India में 20 जनप्रतिनिधियों के जाने का आंकड़ा दर्ज किया गया है। इसके अलावा कांग्रेस में 9, शिवसेना में 8, NPP में 6 और PPA में 4 जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
दूसरी पार्टियों में शामिल होने वाले जनप्रतिनिधि
| पार्टी | शामिल हुए सांसद/विधायक |
|---|---|
| NPF | 32 |
| BJP | 29 |
| Nationalist Citizens Party of India | 20 |
| कांग्रेस | 9 |
| शिवसेना | 8 |
| NPP | 6 |
| PPA | 4 |
इन आंकड़ों के अनुसार NPF, BJP और Nationalist Citizens Party of India में शामिल होने वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या मिलाकर 81 रही, जो कुल 111 मामलों का लगभग 73 फीसदी है।
सबसे ज्यादा पार्टी छोड़ने वाले जनप्रतिनिधि कहां से आए?
ADR ने केवल यह नहीं देखा कि नेता किस पार्टी में गए, बल्कि यह भी विश्लेषण किया कि वे किस पार्टी से निकले।
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा 25 जनप्रतिनिधि NDPP से दूसरी पार्टियों में गए। इसके बाद AITC के 20 और कांग्रेस के 19 सांसद-विधायक पार्टी बदलने वालों में शामिल रहे।
इसके अलावा BRS के 9, AAP के 7 और NCP के 7 जनप्रतिनिधियों ने भी पार्टी बदली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से 6 और JD(U) से 5 जनप्रतिनिधियों के पार्टी बदलने का आंकड़ा रिपोर्ट में दर्ज है।
नागालैंड में सबसे ज्यादा पार्टी स्विच
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो नागालैंड में सबसे ज्यादा 32 पार्टी स्विच दर्ज किए गए। यह कुल मामलों का लगभग 29 फीसदी है। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20 मामले सामने आए, जो करीब 18 फीसदी हैं।
ADR के अनुसार, 111 पार्टी बदलने वाले मौजूदा सांसद-विधायक 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े थे।
दल-बदल के चार अलग-अलग तरीके
ADR ने पार्टी बदलने वाले मामलों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा है। रिपोर्ट में इसके अलग-अलग स्वरूप बताए गए हैं।
पहला, कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपनी सीट छोड़े बिना अपनी पार्टी बदल ली। इसे रिपोर्ट में individual switch या defection की श्रेणी में रखा गया है।
दूसरा, कुछ मामलों में मूल राजनीतिक पार्टी या उसके विधायी दल के बड़े हिस्से का दूसरी पार्टी में विलय हुआ।
तीसरा, कुछ जनप्रतिनिधियों ने पहले अपने पद से इस्तीफा दिया, फिर दूसरी पार्टी में शामिल हुए और उसके बाद उपचुनाव जीतकर दोबारा सदन में पहुंचे।
चौथा, कुछ मामलों में जनप्रतिनिधि को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराया गया और बाद में उन्होंने दूसरी पार्टी के टिकट पर उपचुनाव जीतकर सदन में वापसी की।
सरकारों पर भी पड़ा है दल-बदल का असर
ADR ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि हाल के वर्षों में कुछ राज्यों में सरकारों के गिरने के पीछे विधायकों के दल-बदल को कारणों में से एक के रूप में बताया गया है। हालांकि, किसी सरकार के गिरने के पीछे कई राजनीतिक और संवैधानिक घटनाक्रम हो सकते हैं, इसलिए आंकड़ों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट में पुराने आंकड़ों से भी तुलना
ADR ने बताया कि इससे पहले उसने 9 सितंबर 2021 को सांसदों और विधायकों के पार्टी बदलने से जुड़ी रिपोर्ट जारी की थी। नई रिपोर्ट 2022 से 2026 की अवधि पर केंद्रित है और इसमें मौजूदा लोकसभा, राज्यसभा तथा विधानसभा सदस्यों के पार्टी बदलने के मामलों का विश्लेषण किया गया है।
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
ADR की रिपोर्ट केवल पार्टी बदलने वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या और उनके राजनीतिक दलों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करती है। इन आंकड़ों से किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में राजनीतिक निष्कर्ष अपने आप नहीं निकलता। पार्टी बदलने के पीछे अलग-अलग मामलों में अलग परिस्थितियां और कारण हो सकते हैं।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा तथ्य यह है कि 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 मौजूदा सांसद-विधायकों ने राजनीतिक दल बदला। इनमें से 32 NPF, 29 BJP और 20 Nationalist Citizens Party of India में शामिल हुए। साथ ही, सबसे ज्यादा पार्टी छोड़ने वाले प्रतिनिधियों के मामले में NDPP, AITC और कांग्रेस प्रमुख रूप से सामने आए।
नोट: ADR ने खुद कहा है कि आधिकारिक आंकड़ों के व्यवस्थित रूप से उपलब्ध न होने के कारण रिपोर्ट में सभी संभावित मामलों का शामिल होना सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। इसलिए इन आंकड़ों को ADR द्वारा पहचाने और विश्लेषित मामलों के रूप में देखा जाना चाहिए।








