उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल की दुर्गम पहाड़ियों पर हुए भीषण हिमस्खलन के बाद लापता हुए आठ पर्वतारोहियों में से दो के शव मंगलवार को बचाव दल ने बरामद कर लिए। दोनों मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। वहीं, इस हादसे के बाद से लापता अन्य छह लोगों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी है। गौरतलब है कि 29 अक्टूबर को केदारताल के ऊंचाई वाले दुर्गम ट्रेक मार्ग पर भारी हिमस्खलन हुआ था, जिसकी चपेट में आने के बाद आठ सदस्यीय पर्वतारोहण दल के सभी सदस्यों का संपर्क टूट गया था।
उत्तरकाशी के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं ने बताया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) की संयुक्त टीम ने केदार खरक के आसपास तलाशी अभियान के दौरान दो शवों को खोज निकाला। उन्होंने बताया कि बचाव दल ने सैटेलाइट फोन के माध्यम से इसकी सूचना प्रशासन को दी। बरामद किए गए शवों में एक पुरुष और एक महिला का शव शामिल है। हालांकि, दोनों की पहचान से संबंधित जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
गुसाईं के मुताबिक, मंगलवार को दोपहर करीब तीन बजे तक तलाशी अभियान चलाया गया। इसके बाद बचाव दल दिनभर का अभियान समाप्त कर केदार खरक स्थित अपने आधार शिविर में लौट आया। बुधवार को एक बार फिर लापता लोगों की तलाश शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि बचाव कार्य को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से घटनास्थल के नजदीक एक वैकल्पिक हेलीपैड भी तैयार किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दल को आसानी से प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, संयुक्त बचाव दल को केदार खरक के आसपास कुछ टेंट और उपकरणों से भरे बैग भी मिले हैं। केदार खरक इस ट्रेक मार्ग पर स्थित दूसरा प्रमुख पड़ाव है, जो समुद्र तल से लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। इससे पहले सोमवार को एसडीआरएफ और एनआईएम के 10 सदस्यों वाली संयुक्त टीम को हेलीकॉप्टर के माध्यम से केदार खरक पहुंचाया गया था। इसके बाद से ही टीम ने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में लापता पर्वतारोहियों की तलाश शुरू कर दी थी।
लापता हुए आठ लोगों के समूह में पश्चिम बंगाल के पांच पुरुष पर्वतारोही, उत्तर प्रदेश की दो महिला पर्वतारोही और उत्तरकाशी का एक स्थानीय गाइड शामिल था। यह पूरा दल केदारताल की यात्रा पर निकला था। 29 अक्टूबर को जब पर्वतारोही दल ग्लेशियर से बनी केदारताल झील से नीचे उतर रहा था, तभी केदार खरक के निकट अचानक भारी हिमस्खलन हुआ। बर्फ का विशाल हिस्सा खिसककर नीचे आने से पूरा इलाका प्रभावित हो गया और दल के आठ सदस्यों का संपर्क बाकी लोगों से टूट गया।
केदारताल झील समुद्र तल से लगभग 15,485 फीट यानी 4,720 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह झील थलाय सागर, भृगुपंथ और जोगिन पर्वत चोटियों से पिघलकर आने वाली बर्फ के पानी से पोषित होती है। प्राकृतिक सुंदरता और दुर्गम पर्वतीय परिस्थितियों के कारण यह स्थान अनुभवी पर्वतारोहियों और ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग करने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। हालांकि, यहां तक पहुंचने का रास्ता बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है और इस मार्ग पर मौसम तथा भौगोलिक परिस्थितियां लगातार जोखिम पैदा करती हैं।
गंगोत्री से शुरू होने वाला केदारताल ट्रेक लगभग 18 किलोमीटर लंबा है। इस रास्ते में केदार गंगा नदी के किनारे बेहद खड़ी चढ़ाई से गुजरना पड़ता है। यात्रा के दौरान पर्वतारोहियों को घने भोजपत्र के जंगलों, ऊंचाई पर स्थित हरे-भरे घास के मैदानों और अस्थिर मोरेन क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ना पड़ता है। इन इलाकों में बर्फ, चट्टानों और ढीली मिट्टी की वजह से रास्ता काफी संवेदनशील रहता है। ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव या हिमस्खलन जैसी घटनाएं पर्वतारोहियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
जानकारी के मुताबिक, इस अभियान में कुल 12 लोग शामिल थे। इनमें सात पर्वतारोही और पांच सहायक कर्मचारी थे। यह दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से अपनी यात्रा पर रवाना हुआ था और इसे 29 अक्टूबर तक अपना निर्धारित ट्रेक पूरा करना था। हालांकि, इसी दौरान हुए हिमस्खलन ने अभियान को भीषण हादसे में बदल दिया। घटना के बाद आठ लोगों से संपर्क नहीं हो पाया, जबकि दल के चार सहायक कर्मचारी किसी तरह सुरक्षित वापस गंगोत्री पहुंचने में सफल रहे।
बताया गया कि 30 अक्टूबर को चारों सहायक कर्मचारी हिमस्खलन के बाद किसी तरह रास्ता तय करते हुए गंगोत्री लौटे। इसी दौरान उन्होंने बाकी आठ सदस्यों से संपर्क टूटने की जानकारी दी, जिसके बाद प्रशासन को घटना की सूचना दी गई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं ने बताया कि ट्रेकिंग का संचालन करने वाली संस्था सोल सीकर की ओर से जानकारी मिलते ही बचाव दलों को तत्काल सक्रिय कर दिया गया था। इसके बाद प्रभावित क्षेत्र में लापता लोगों को खोजने के लिए अभियान शुरू किया गया।
वहीं, एसडीआरएफ के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी ने बताया कि क्षेत्र में खराब मौसम के कारण तलाशी और बचाव अभियान चलाने में लगातार परेशानियां आ रही हैं। ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी इलाके में मौसम का मिजाज बार-बार बदल रहा है, जिससे बचाव दलों की आवाजाही और तलाशी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार लापता छह लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। मंगलवार को दो शव मिलने के बाद अब बचाव अभियान और अधिक सतर्कता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।








