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November 3, 2026 4:00 pm

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धीरेंद्र शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी से मचा सियासी घमासान, अखिलेश यादव से तेजस्वी तक ने साधा निशाना; माफी के बाद भी नहीं थम रहा विवाद

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में विवाद खड़ा कर दिया है। भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, उनकी खड़े होने की मुद्रा और उसे लेकर की गई टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने धीरेंद्र शास्त्री पर तीखे सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई नेताओं ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी भी मांगी, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस टिप्पणी को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि मानवीय भूलों के लिए क्षमा की जा सकती है, लेकिन ईशनिंदा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। अखिलेश यादव ने ऐसे लोगों के सार्वजनिक कार्यक्रमों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि देशभर में उनके सभी कार्यक्रम रद्द किए जाने चाहिए और भविष्य में उन्हें किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चे सनातनियों को ऐसे लोगों का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार करना चाहिए।

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि किसी व्यक्ति के भीतर इतना अहंकार नहीं होना चाहिए कि वह स्वयं को ईश्वर से भी ऊपर समझने लगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने कथित कृत्य पर जीवनभर एकांत में रहकर पश्चाताप और प्रायश्चित भी करे, तब भी आस्थावान लोगों के लिए उसे क्षमा करना आसान नहीं होगा। सपा प्रमुख ने इस मामले में वैधानिक कार्रवाई किए जाने की भी मांग की। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के स्वरूपों की तुलना को लेकर की गई टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने संत सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के बीच भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों के प्रति भक्ति से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संवाद कभी एक स्वरूप को दूसरे से श्रेष्ठ साबित करने के उद्देश्य से नहीं था। भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन के माधुर्य भाव को प्रकट किया, जबकि भगवान श्रीराम ने अयोध्या की मर्यादा और आदर्शों को स्थापित किया। दोनों ही एक ही दिव्य सत्ता के अलग-अलग स्वरूप हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम का धनुष और भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी एक ही दिव्य सत्ता के दो अभिन्न प्रतीक हैं। उनके अनुसार, दोनों स्वरूपों के बीच आध्यात्मिक संबंध को सामान्य या हल्के-फुल्के अर्थों में सीमित करना उचित नहीं है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र त्रिभंगी मुद्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे केवल टेढ़ेपन के रूप में प्रस्तुत करना उसके आध्यात्मिक सौंदर्य और गहरे भाव को कमतर करने जैसा है। उन्होंने कहा कि किसी पवित्र धार्मिक स्वरूप की गरिमा को केवल सनसनी पैदा करने या अपनी बात को नाटकीय बनाने के लिए प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने ऐसी टिप्पणियों का बचाव बंद करने की अपील भी की।

राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को लोकनायक बताते हुए कहा कि वे ऐसे आराध्य हैं, जिनकी महिमा धार्मिक सीमाओं से परे जन-जन के बीच स्थापित है। तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में भगवान श्रीकृष्ण के उस प्रसंग का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अहंकार को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पर इस तरह की टिप्पणी अशोभनीय, अमर्यादित और अक्षम्य है।

तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पहले समाज में इंसानों को बांटने का काम करते थे और अब भगवान के स्वरूपों के बीच भी विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। तेजस्वी ने इसे राजनीतिक स्वार्थ से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसे लोग कितनी गिरावट तक जाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेताओं से भी इस मामले पर सामने आकर देश, समाज और सनातन धर्म को मानने वाले लोगों से माफी मांगने की मांग की।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आ रही है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भाजपा के करीबी माने जाने वाले व्यक्ति की ओर से भगवान श्रीकृष्ण को लेकर इस तरह की बातें कही जा रही हैं, लेकिन पार्टी के नेता चुप हैं। महुआ मोइत्रा ने कहा कि यदि किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसी टिप्पणी की होती तो भाजपा से जुड़े लोग इसे लेकर बड़ा विरोध खड़ा कर देते। उन्होंने सवाल किया कि अब इस मामले में खामोशी क्यों है और क्या भाजपा अपने करीबी माने जाने वाले धर्मगुरुओं की टिप्पणियों पर नियंत्रण नहीं रख सकती।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी धीरेंद्र शास्त्री पर कटाक्ष किया। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के बीच अंतर बताने तथा अयोध्या और वृंदावन की तुलना करने जैसी बातें समझ से परे हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे बयानों की जांच कराई जानी चाहिए। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व की बात करने वाले कुछ लोग अब हिंदू धर्म के आराध्य देवी-देवताओं पर ही इस तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने उन लोगों से भी सवाल किया, जो स्वयं को हिंदू धर्म और धार्मिक भावनाओं का रक्षक बताते हैं। उनका कहना था कि इस मामले में धार्मिक भावनाएं आहत होने पर ऐसे लोगों की प्रतिक्रिया सामने क्यों नहीं आ रही है।

दरअसल, पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान शुरू हुआ। कथा के मंच से धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूपों की तुलना करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की खड़े होने की मुद्रा को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने भगवान कृष्ण के खड़े होने के अंदाज को टेढ़ा बताया था। इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा, जिसके बाद कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया। देखते ही देखते मामला धार्मिक चर्चा से निकलकर राजनीतिक विवाद में बदल गया और विपक्षी दलों के नेताओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।

विवाद लगातार बढ़ता देख धीरेंद्र शास्त्री ने एक वीडियो जारी किया और हाथ जोड़कर माफी मांगी। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है। उनका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का अपमान करना या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथा के दौरान वे विनोद और भक्ति भाव के संदर्भ में अपनी बात रख रहे थे। उनके अनुसार, उनकी टिप्पणी को उसी भाव में समझा जाना चाहिए था, लेकिन उसका अलग अर्थ निकाल लिया गया।

हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री की ओर से माफी मांगे जाने के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं और कार्रवाई की मांग के बीच यह मामला लगातार राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान ने धार्मिक आस्था, सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार भाषा के इस्तेमाल और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि माफी के बाद यह विवाद शांत होता है या आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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