देश में ऐसे कई हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं, जहां लोग हकीकत में जिंदा थे, लेकिन सरकारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। किसी को पेंशन मिलनी बंद हो गई, किसी का राशन रुक गया तो किसी को अपनी ही जमीन से जुड़े काम कराने के लिए पहले खुद को जिंदा साबित करना पड़ा। वहीं कुछ मामलों में अस्पतालों ने मरीजों को मृत घोषित कर दिया, लेकिन बाद में उनके जीवित होने का पता चला। इन घटनाओं ने सरकारी व्यवस्था, पहचान सत्यापन और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
झांसी की राजाबाई: पेंशन बंद हुई तो पता चला कागजों में मर चुकी हैं
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर क्षेत्र के धौरा गांव की रहने वाली राजाबाई के साथ ऐसा ही मामला सामने आया। बुजुर्ग महिला को वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी, लेकिन अचानक उनकी पेंशन आनी बंद हो गई। जब उन्होंने इसकी वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है।
इसके बाद 7 अक्टूबर 2026 को राजाबाई अपनी शिकायत लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वह जिंदा हैं, लेकिन रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया जा रहा है। उनकी शिकायत के बाद समाज कल्याण विभाग को जांच के निर्देश दिए गए।
बिहार के इदरीश: जमीन का बंटवारा कराने पहुंचे तो खुद मृत निकले
बिहार के सीतामढ़ी जिले के बेलसंड क्षेत्र में मोहम्मद इदरीश के साथ भी ऐसी ही घटना हुई। वह अपनी पुश्तैनी जमीन बच्चों के नाम करना चाहते थे। इसी सिलसिले में वह अंचल कार्यालय पहुंचे और जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़ी प्रक्रिया शुरू कराई।
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम मृत व्यक्ति के रूप में दर्ज मिला। यानी जो व्यक्ति खुद जमीन के कागजात ठीक कराने कार्यालय पहुंचा था, सरकारी दस्तावेजों में उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद इदरीश और उनके परिवार को रिकॉर्ड ठीक कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े। अंचल अधिकारी ने इसे भूलवश हुई गलती बताया।
कर्नाटक के शफीउल्ला खान: राशन और बैंकिंग सेवाएं तक प्रभावित
कर्नाटक के मांड्या निवासी 50 वर्षीय मैकेनिक शफीउल्ला खान को भी सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया। उन्हें इस बात का पता तब चला, जब राशन मिलना बंद हो गया और बैंक से जुड़े लेन-देन में परेशानी आने लगी।
जांच करने पर पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु अक्टूबर 2024 में दर्ज है। यहां तक कि उनके नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी हो चुका था। शफीउल्ला का कहना है कि वह लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अपनी पहचान और जीवित होने का प्रमाण देने के बावजूद परेशानी खत्म नहीं हुई। इस मामले में अस्पताल के रिकॉर्ड में नाम को लेकर भी सवाल उठे हैं।
राजस्थान में अंतिम संस्कार से पहले जीवित मिला युवक
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में नवंबर 2024 में एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई थी। यहां 25 वर्षीय रोहिताश कुमार को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। उन्हें अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया, लेकिन चिता पर रखने से पहले उनमें सांस लेने के संकेत दिखाई दिए।
इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और इलाज शुरू किया गया। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, इलाज के दौरान बाद में रोहिताश की मौत हो गई।
कोलकाता में मृत घोषित मरीज अस्पताल में ही मिला जिंदा
कोलकाता के चित्तरंजन नेशनल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी एक मरीज को मृत घोषित किए जाने का मामला सामने आया था। साबिर मोल्ला को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में परिवार को उनकी मौत की सूचना दी गई और डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया।
अगले दिन जब परिवार के सदस्य शव लेने अस्पताल पहुंचे तो साबिर अस्पताल की दूसरी इमारत के बाथरूम में दिखाई दिए। उन्होंने अपने रिश्तेदार को आवाज लगाई। इसके बाद परिवार ने अस्पताल प्रशासन को जानकारी दी और मरीज को अस्पताल से छुट्टी दी गई। मामले की जांच शुरू की गई।
आगरा में घर पर जिंदा मिला मृत घोषित व्यक्ति
उत्तर प्रदेश के आगरा में भी अस्पताल की कथित लापरवाही का मामला सामने आया था। कुश चौरसिया को सांप काटने के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन बाद में अस्पताल की ओर से पुलिस को उनकी मौत की सूचना दे दी गई।
जब पुलिस उनके घर पहुंची तो कुश को जिंदा देखकर हैरान रह गई। परिवार ने इसे अस्पताल की रिकॉर्ड संबंधी गलती बताया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच के आदेश दिए।
क्यों गंभीर हैं ऐसे मामले?
इन घटनाओं में कुछ मामले सरकारी रिकॉर्ड में गलत तरीके से मृत्यु दर्ज किए जाने से जुड़े हैं, जबकि कुछ अस्पतालों में मरीज को मृत घोषित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाने का असर उसकी पेंशन, राशन, बैंकिंग, संपत्ति और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर पड़ सकता है।
ऐसे मामलों में केवल रिकॉर्ड में सुधार करना ही नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी जरूरी है कि गलती किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। क्योंकि किसी व्यक्ति को अपनी जिंदगी का सबूत देने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल है।








