बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में नौ नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित हरकतें और यौन उत्पीड़न करने के गंभीर मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने शिक्षक तिलक राम वर्मा को 6 साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी शिक्षक पलारी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टीपावन स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में प्रभारी प्राचार्य के पद पर अपनी सेवाएं दे रहा था। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित छात्रा ने हिम्मत जुटाकर अपनी आपबीती स्कूल की एक शिक्षिका और अपनी मां को बताई, जिसके बाद एक-एक करके अन्य छात्राओं ने भी आरोपी शिक्षक के खिलाफ अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
घटना के विवरण के अनुसार, आरोपी शिक्षक तिलक राम वर्मा ने एक छात्रा को उसके पिता के स्वास्थ्य और हालचाल पूछने के बहाने से बहाने से स्टाफ रूम में बुलाया था। स्टाफ रूम में अकेले में बातचीत के दौरान उसने कथित तौर पर छात्रा की पीठ और कमर पर आपत्तिजनक तरीके से हाथ फेरा तथा उसके सीने को छूने की नीच हरकत की। इस अवांछित स्पर्श और अपमानजनक व्यवहार से सहमी और घबराकर छात्रा तुरंत वहां से भाग निकली।
इस घटना के कुछ समय पश्चात स्कूल की एक शिक्षिका ने कक्षाओं में जाकर छात्राओं को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के अंतर के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके साथ अनुचित स्पर्श करे, तो वे बिना डरे तुरंत अपने माता-पिता या शिक्षकों को इसकी जानकारी दें। इसी जागरूकता सत्र के दौरान जब शिक्षिका ने छात्राओं से उनके साथ हुई किसी भी गलत हरकत के बारे में पूछा, तब उस पीड़ित छात्रा ने साहस दिखाते हुए अपने साथ घटी पूरी घटना की जानकारी शिक्षिका और अपनी मां के साथ साझा की।
पहली पीड़िता के सामने आने के बाद स्कूल में पढ़ने वाली अन्य छात्राओं ने भी आरोपी शिक्षक के खिलाफ इसी तरह की अश्लील और अनुचित हरकतें करने के गंभीर आरोप लगाए। कुल नौ नाबालिग छात्राओं के खुलकर सामने आने और शिकायत करने के बाद यह मामला पुलिस तक पहुंचा। छात्राओं की लिखित और मौखिक शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 74 व 75(1), पॉक्सो एक्ट की धारा 8 व 9(f), तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v)(क) के तहत एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।
पुलिस ने मामले की गहन तफ्तीश पूरी कर साक्ष्य एकत्र किए और समय पर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने अभियोजन पक्ष का पक्ष मजबूती से रखा और कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अदालत ने पीड़िताओं के बยาน, चिकित्सा रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी शिक्षक को दोषी करार दिया।
विशेष पॉक्सो अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत 2 साल के सश्रम कारावास और पॉक्सो एक्ट की धारा 9(f) के तहत 6 साल के सश्रम कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है, जिसके तहत आरोपी को अधिकतम 6 साल की कैद काटनी होगी। इस फैसले ने एक बार फिर से स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा, उनकी शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को देश के सामने मजबूती से रखा है।








