दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विश्वविद्यालय पहुंचने और प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करने की खबर सामने आई है। छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। छात्र विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली और चुनाव की तारीख तय करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच राहुल गांधी के संभावित दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, राहुल गांधी के दौरे और छात्रों से मुलाकात के कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं जामिया के छात्र?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं। विश्वविद्यालय में आखिरी बार 2005 में चुनाव हुए थे और 2006 से निर्वाचित छात्रसंघ अस्तित्व में नहीं है। छात्र इसी व्यवस्था को बहाल करने और चुनाव कराने की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि केवल चुनाव कराने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रसंघ का संविधान कब मंजूर होगा और चुनाव कब कराए जाएंगे।
छात्रों की मांगों में आंदोलन के दौरान जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेना तथा सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार की जांच कराना भी शामिल रहा है। आंदोलन के दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन चुनाव की समयसीमा और अन्य मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कदम उठाया?
26 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर कहा कि छात्रसंघ का संविधान मंजूर होने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासन ने प्रदर्शन की अवधि में जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कर्मचारियों के आचरण की जांच के लिए समिति बनाने की बात भी कही। हालांकि, आदेश में संविधान को मंजूरी देने की अंतिम तारीख स्पष्ट नहीं की गई। इसी वजह से प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए निश्चित समयसीमा की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
जामिया का छात्र आंदोलन अब विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न राजनीतिक नेताओं और छात्र संगठनों की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आई है। ऐसे में राहुल गांधी के संभावित दौरे की खबर ने इस मामले को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यदि राहुल गांधी प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करते हैं, तो छात्रसंघ चुनाव की बहाली और छात्रों की मांगों पर कांग्रेस का रुख चर्चा का विषय बन सकता है।
हालांकि, किसी नेता की मुलाकात को विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाने या किसी राजनीतिक फैसले का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल, छात्रों की मुख्य मांग चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी प्रदर्शन के बीच बातचीत जारी होने की बात कही है और परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
अब आगे क्या होगा?
जामिया में जारी विवाद का समाधान इस बात पर निर्भर करेगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ के संविधान को कब मंजूरी देता है और चुनाव की तारीख को लेकर कितना स्पष्ट कार्यक्रम जारी करता है। वहीं, छात्रों की ओर से भी प्रशासन के आश्वासन पर सहमति और आंदोलन को लेकर आगे का फैसला महत्वपूर्ण रहेगा।
राहुल गांधी के संभावित दौरे को लेकर भी अब आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। फिलहाल, जामिया में छात्रसंघ चुनाव की बहाली, प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें और विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।








