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October 27, 2026 7:50 pm

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का आर-पार का ऐलान, बोली- हटाए बिना चैन से नहीं बैठेंगे; अनुमति पर पुलिस का जवाब

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस ने अपना रुख सख्त कर लिया है। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और अपनी मांग को लेकर विरोध जारी रखेगी। इसी बीच, कांग्रेस के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अनुमति का विवाद भी सामने आया है। कांग्रेस ने दावा किया कि उसे बैठक आयोजित करने की अनुमति नहीं मिली, जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि अनुमति से जुड़ी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची और विपक्ष के विरोध कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव निष्पक्ष होना और मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बना रही है।

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर कांग्रेस का सख्त रुख

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक पार्टी इस मुद्दे को उठाती रहेगी। पार्टी चुनाव आयोग की कार्यशैली और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

हालांकि, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कांग्रेस का राजनीतिक रुख है। पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड, आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के पक्ष को देखना जरूरी है। फिलहाल इस मुद्दे पर कांग्रेस और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

बैठक की अनुमति को लेकर कांग्रेस और दिल्ली पुलिस के दावे

प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने दावा किया कि उसे बैठक आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई। पार्टी नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि वे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रैली के लिए जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी NOC न तो वापस लिया गया है और न ही रद्द किया गया है। पुलिस ने कहा कि अनुमति की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस की ओर से अशोका होटल में प्रस्तावित प्रतीकात्मक संसद सत्र यानी ‘मॉक पार्लियामेंट’ को लेकर भी अनुमति का सवाल उठा था। पुलिस सूत्रों का कहना था कि होटल के भीतर इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देना दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस तरह कार्यक्रम के स्थान और स्वरूप को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में अंतर सामने आया।

30 अक्टूबर के कार्यक्रम को लेकर चर्चा

कांग्रेस की ओर से 30 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग जैसे विरोध कार्यक्रम की योजना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। शुरुआत में अशोका होटल में कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई, जबकि रामलीला मैदान का नाम भी चर्चा में आया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अनुमति नहीं मिलने का दावा किया था। वहीं, पुलिस की ओर से अनुमति से संबंधित स्थिति में बदलाव नहीं होने की बात कही गई।

यहां यह समझना जरूरी है कि किसी राजनीतिक दल की ओर से आयोजित ‘सार्वजनिक महाभियोग’ या प्रतीकात्मक संसद सत्र संवैधानिक रूप से किसी पदाधिकारी को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है। इसलिए कांग्रेस के प्रस्तावित कार्यक्रम को राजनीतिक विरोध के तौर पर देखा जाना चाहिए।

SIR और मतदाता सूची पर भी जारी है सियासी टकराव

कांग्रेस इस पूरे मामले को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े सवालों के साथ जोड़कर देख रही है। पार्टी की चिंता है कि मतदाता सूची की जांच और संशोधन के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम छूटना नहीं चाहिए। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की त्रुटि को दूर करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था जरूरी है।

कांग्रेस ने मतदाता सूची और SIR से जुड़े मुद्दों पर 26 अक्टूबर से 26 नवंबर तक अभियान चलाने की बात कही है। इसके अलावा, INDIA गठबंधन की ओर से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ के नारे के साथ रैली आयोजित करने की योजना भी सामने आई थी। इस अभियान के जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों को जनता के बीच उठाना चाहता है।

आगे क्या होगा?

ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और प्रस्तावित बैठक की अनुमति को लेकर उठा विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। कांग्रेस अपने विरोध कार्यक्रमों के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने की तैयारी में है, जबकि दिल्ली पुलिस ने अनुमति से जुड़े मामले में किसी बदलाव से इनकार किया है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस अपने प्रस्तावित कार्यक्रमों को किस रूप में आगे बढ़ाती है और मतदाता सूची तथा SIR से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कांग्रेस का राजनीतिक अभियान है और बैठक की अनुमति को लेकर कांग्रेस तथा दिल्ली पुलिस के दावों के बीच अंतर बना हुआ है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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