मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान अब इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्कान ने अपनी सजा के खिलाफ अपील करने की बात कही है। इसके लिए उसे कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और सरकारी वकील की प्रक्रिया को लेकर चर्चा सामने आई है। इस मामले में अब आगे की कानूनी कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं।
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में लोगों का ध्यान खींचा था। मामले में सामने आए घटनाक्रम और अदालत के फैसले के बाद यह केस लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब सजा के खिलाफ अपील करने की तैयारी से मामले में कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होने की संभावना है।
सरकारी वकील की मदद से आगे बढ़ेगी कानूनी लड़ाई
मुस्कान और इस मामले में सह-दोषी साहिल शुक्ला दोनों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेल प्रशासन ने अपील के लिए वकील उपलब्ध कराने के संबंध में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क किया है। यदि दोषी निजी वकील की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें नियमानुसार कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
क्या हाईकोर्ट में अपील के बाद भी फांसी हो सकती है?
कानूनी प्रक्रिया के तहत निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को हाईकोर्ट की पुष्टि के लिए भेजा जाता है। हाईकोर्ट मामले के साक्ष्यों, फैसले और सजा की समीक्षा करता है। इसके बाद कानून के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में अपील और अन्य उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लिया जा सकता है। इसलिए निचली अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि सजा पर तुरंत अमल हो जाएगा।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में आगे क्या होगा?
मेरठ के इस चर्चित मामले में अब अगला महत्वपूर्ण चरण सजा के खिलाफ कानूनी कार्यवाही है। मुस्कान और साहिल की अपील, हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई और मौत की सजा की न्यायिक पुष्टि आगे की प्रक्रिया के प्रमुख हिस्से होंगे।
फिलहाल, मुस्कान की ओर से अपील की तैयारी की खबर सामने आने के बाद मामले में कानूनी कार्यवाही पर ध्यान केंद्रित हो गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अपील कब दाखिल होती है और अदालत इस मामले में आगे क्या निर्णय लेती है।







