करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने के साथ होती है। आमतौर पर सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। हालांकि, इस बार व्रत के दिन सुबह भद्रा का समय भी बताया जा रहा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसी को लेकर ज्योतिषाचार्य ने सरगी खाने, पूजा करने और चंद्रमा के दर्शन के समय की जानकारी साझा की है।
करवा चौथ पर कब खाएं सरगी?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 29 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 46 मिनट तक भद्रा का समय रहेगा। इसकी अवधि लगभग 21 मिनट बताई गई है। उन्होंने इस दौरान सरगी का सेवन करने से बचने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, इस अवधि में महिलाओं को शृंगार करने और करवा चौथ की पूजा करने से भी परहेज करना चाहिए।
परंपरा के अनुसार, महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद व्रत शुरू करती हैं। पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखने के बाद शाम को करवा चौथ की पूजा की जाती है। इसके बाद रात में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और पति की लंबी उम्र तथा सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल करवा चौथ की पूजा और कथा सुनने के लिए शाम का समय महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने बताया कि 29 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक पूजा और करवा चौथ की कथा के लिए समय निर्धारित किया गया है।
इस दौरान महिलाएं विधि-विधान से करवा माता की पूजा कर सकती हैं और व्रत कथा सुन सकती हैं। करवा चौथ पर पूजा के समय महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं तथा अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं। हालांकि, पूजा के सटीक मुहूर्त की पुष्टि अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार कर लेना उचित रहेगा, क्योंकि स्थान के हिसाब से समय में अंतर हो सकता है।
करवा चौथ पर रात में कितने बजे निकलेगा चांद?
करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व होता है। व्रत रखने वाली महिलाएं चांद निकलने का इंतजार करती हैं और उसके दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलती हैं। इस साल 29 अक्टूबर को रात 8 बजकर 15 मिनट के बाद चंद्रमा के निकलने की संभावना है।
चंद्रमा के दर्शन होने के बाद महिलाएं परंपरा के अनुसार उन्हें अर्घ्य देती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुखी जीवन की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि, चंद्रोदय का वास्तविक समय शहर और भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने क्षेत्र के स्थानीय समय की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।
करवा चौथ के अवसर पर व्रत, पूजा और चंद्र दर्शन से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व है। भद्रा के समय को लेकर बताई गई सावधानियां ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। ऐसे में महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकती हैं।








