सोने और चांदी की कीमतों में पिछले दो महीनों के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कभी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही इन कीमती धातुओं के भाव अब काफी नीचे आ चुके हैं। चांदी की कीमत में करीब 55,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है, जबकि सोना भी 10 ग्राम पर लगभग 24,000 रुपये सस्ता हो गया है। इस गिरावट के बाद त्योहारी सीजन में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है या कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है।
दो महीने में कितना सस्ता हुआ सोना?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को सोने का वायदा भाव 1,65,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, 23 अक्टूबर 2026 को यह गिरकर 1,42,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस तरह करीब दो महीनों में सोने की कीमत में 23,450 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। अक्टूबर महीने में ही सोने के भाव में लगभग 8,000 रुपये तक की कमी आई है।
सोने की कीमतों में इस गिरावट का असर उन निवेशकों पर भी पड़ा है, जिन्होंने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी। हालांकि, सोने को लंबे समय से सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन इसकी कीमतें भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती से प्रभावित होती हैं।
चांदी की कीमत में 55,000 रुपये की गिरावट
सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली है। MCX पर 24 अगस्त को चांदी का वायदा भाव करीब 2.51 लाख रुपये प्रति किलो था, जो 23 अक्टूबर को घटकर लगभग 1.96 लाख रुपये प्रति किलो रह गया। इस तरह दो महीने के भीतर चांदी करीब 55,000 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।
अक्टूबर में ही चांदी की कीमतों में लगभग 30,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद चांदी का भाव 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे पहुंच गया। इससे पहले चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, लेकिन अब बाजार में बिकवाली बढ़ने के कारण इसके भाव पर दबाव बना हुआ है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से कितना नीचे आए सोना-चांदी के भाव?
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट केवल पिछले दो महीनों तक सीमित नहीं है। दोनों धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर से भी काफी नीचे आ चुकी हैं। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक, सोने का रिकॉर्ड उच्च स्तर करीब 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा है। इसके मुकाबले सोना लगभग 51,000 रुपये नीचे आ चुका है।
वहीं, चांदी का रिकॉर्ड उच्च स्तर करीब 4.20 लाख रुपये प्रति किलो बताया गया है। इस स्तर से तुलना करें तो चांदी की कीमत में लगभग 2.24 लाख रुपये तक की गिरावट आ चुकी है। हालांकि, ये वायदा बाजार के भाव हैं। स्थानीय सर्राफा बाजार में कीमतें शहर, शुद्धता, टैक्स और अन्य शुल्कों के हिसाब से अलग हो सकती हैं।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने और चांदी के दाम?
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं। इनमें मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर शामिल हैं।
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: मध्य पूर्व में तनाव और सऊदी अरब से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत होती है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।
2. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता: बाजार में आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जहां उन्हें ब्याज या नियमित रिटर्न मिलने की संभावना हो। सोना और चांदी खुद ब्याज नहीं देते, इसलिए ऐसे समय में इनकी मांग पर दबाव पड़ सकता है।
3. बॉन्ड यील्ड और डॉलर का असर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने और डॉलर मजबूत होने से भी सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं का कारोबार बड़े पैमाने पर डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती दूसरे देशों के खरीदारों के लिए इन्हें महंगा बना सकती है।
4. मुनाफावसूली और बाजार में उतार-चढ़ाव: कीमतों में पहले तेज तेजी आने के बाद कुछ निवेशक मुनाफा निकालने के लिए बिकवाली करते हैं। इससे भाव नीचे आ सकते हैं। चांदी में औद्योगिक मांग की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, इसलिए आर्थिक गतिविधियों और उद्योगों की मांग को लेकर चिंताओं का असर इसकी कीमतों पर पड़ सकता है।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?
कीमतों में आई बड़ी गिरावट के बाद सोना-चांदी खरीदने का विचार आकर्षक लग सकता है, लेकिन केवल भाव कम होने के आधार पर खरीदारी का फैसला करना उचित नहीं है। बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि कीमतें यहां से बढ़ेंगी या इनमें और गिरावट आएगी।
अगर कोई व्यक्ति शादी, त्योहार या किसी अन्य जरूरत के लिए सोना-चांदी खरीदना चाहता है, तो उसे अपनी जरूरत, बजट और खरीदारी के समय को ध्यान में रखना चाहिए। एक ही बार में पूरी रकम खर्च करने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी पर विचार किया जा सकता है। इससे अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी करने का अवसर मिलता है, हालांकि इससे मुनाफे की गारंटी नहीं होती।
निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को यह भी समझना चाहिए कि सोने और चांदी की कीमतें कम समय में काफी बदल सकती हैं। खासकर चांदी में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकता है। इसलिए जल्द मुनाफा कमाने की उम्मीद में जल्दबाजी करने के बजाय जोखिम और निवेश की अवधि को समझना जरूरी है।
ज्वेलरी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
सोना-चांदी खरीदने से पहले केवल बाजार भाव देखना पर्याप्त नहीं है। सोने की शुद्धता, हॉलमार्क, प्रति ग्राम कीमत, मेकिंग चार्ज और जीएसटी की जानकारी जरूर लें। चांदी के मामले में भी उसकी शुद्धता और बिल पर दर्ज वजन की जांच करना जरूरी है।
यह भी ध्यान रखें कि MCX का वायदा भाव और ज्वेलरी की दुकान पर मिलने वाला खुदरा भाव एक जैसा नहीं होता। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज और टैक्स के कारण अंतिम कीमत अधिक हो सकती है। अलग-अलग दुकानों के भाव और शुल्कों की तुलना करने से खरीदारी का बेहतर फैसला लेने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, दो महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों को राहत जरूर दी है, लेकिन बाजार की दिशा अभी अनिश्चित है। कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, कच्चे तेल और वैश्विक तनाव का असर बना रह सकता है। ऐसे में खरीदारी का फैसला अपनी वास्तविक जरूरत और आर्थिक स्थिति के आधार पर करना बेहतर होगा।








