मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के परिवारों से मिलने की खबर सामने आई है। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति और स्थानीय समस्याओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने आदिवासी समुदाय के अधिकारों और उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही।
बालाघाट के बैगा बहुल इलाकों में बच्चों के बीमार पड़ने और मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। अगस्त में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, चार दूरस्थ गांवों में कई बच्चे बीमार हुए थे और छह बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई थी। बीमारी का सटीक कारण उस समय जांच के अधीन था और बच्चों के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे।
प्रभावित परिवारों से मुलाकात
राहुल गांधी ने मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात के दौरान उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान आदिवासी परिवारों की स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण और बुनियादी जरूरतों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे।
उन्होंने आदिवासी समुदाय को देश का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके अधिकारों की बात की। राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी परिवारों को उनका हक मिलना चाहिए। उनके दौरे को क्षेत्र में आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर एक राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है।
बालाघाट में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
बालाघाट के दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच एक बड़ी चुनौती रही है। पहले की रिपोर्टों में बताया गया था कि प्रभावित गांवों तक स्वास्थ्य विभाग की टीमों को पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बच्चों में बुखार, त्वचा पर चकत्ते और पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे लक्षण बताए गए थे।
अगस्त की एक रिपोर्ट में बालाघाट के बैगा क्षेत्र में 19 बच्चों की मौत का उल्लेख भी किया गया था। उस रिपोर्ट के अनुसार, बाद की जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण को मौतों से जुड़ी प्रमुख वजहों के तौर पर बताया गया था।
आदिवासी अधिकारों का मुद्दा
राहुल गांधी ने इस दौरान आदिवासी परिवारों के अधिकारों और उन्हें जरूरी सुविधाएं मिलने की बात कही। उनके बयान में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को महत्व दिया गया।
बालाघाट में आदिवासी आबादी बड़ी संख्या में है। निर्वाचन संबंधी उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले की आबादी में अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी 24.73 प्रतिशत बताई गई है।
मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की पहुंच को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है। मामले में स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तथा आगे की जांच से स्थिति के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।








