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August 23, 2026 8:28 pm

देर तक टॉयलेट रोकना पड़ सकता है भारी! शरीर में हो सकती हैं ये परेशानियां, जानें एक्सपर्ट की सलाह

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आजकल व्यस्त दिनचर्या, सफर, स्कूल-कॉलेज या काम के दौरान कई लोग टॉयलेट जाने की जरूरत को कुछ देर के लिए टाल देते हैं। कभी-कभार ऐसा होना आम बात है, लेकिन अगर पेशाब या मल त्याग की जरूरत को बार-बार और लंबे समय तक रोकने की आदत बन जाए, तो यह शरीर के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

पेशाब लंबे समय तक रोकने से क्या हो सकता है?

पेशाब को लगातार रोकने से मूत्राशय पर दबाव बढ़ सकता है। सामान्य तौर पर शरीर पेशाब जमा होने पर दिमाग को संकेत देता है कि अब टॉयलेट जाने की जरूरत है। इस संकेत को बार-बार नजरअंदाज करने से पेशाब करने की सामान्य आदत और ब्लैडर के काम करने के तरीके पर असर पड़ सकता है।

कुछ लोगों में लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत से पेशाब पूरी तरह खाली न होने जैसी समस्या भी हो सकती है। इससे बार-बार पेशाब लगना, पेशाब करते समय परेशानी या निचले पेट में असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

यूरिन इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है

पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखने से कुछ लोगों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का जोखिम बढ़ सकता है, खासकर अगर व्यक्ति पहले से ही संक्रमण के प्रति संवेदनशील हो। इसके लक्षणों में पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब की इच्छा, बदबूदार या असामान्य पेशाब और पेट के निचले हिस्से में दर्द शामिल हो सकते हैं।

अगर ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

मल त्याग रोकना भी ठीक नहीं

सिर्फ पेशाब ही नहीं, मल त्याग की इच्छा को बार-बार रोकना भी सही आदत नहीं है। मल को लंबे समय तक रोकने से वह आंत में अधिक समय तक रह सकता है और उसमें से पानी ज्यादा अवशोषित हो सकता है। इससे मल कठोर हो सकता है और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।

कब्ज के कारण पेट फूलना, पेट में असहजता और मल त्याग के दौरान जोर लगाने की जरूरत पड़ सकती है। लगातार जोर लगाने से बवासीर जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर पेशाब या मल त्याग से जुड़ी परेशानी बार-बार हो रही है, दर्द या जलन रहती है, पेशाब में खून दिखाई देता है, बुखार आता है या कब्ज लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। ऐसे लक्षणों को केवल टॉयलेट रोकने की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एक्सपर्ट की सलाह क्या है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ आम तौर पर शरीर के प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं। टॉयलेट की जरूरत महसूस होने पर संभव हो तो समय पर जाएं और रोज पर्याप्त पानी पिएं। साथ ही, फाइबर से भरपूर भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित दिनचर्या कब्ज जैसी समस्याओं से बचाव में मदद कर सकती है।

हालांकि, हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। इसलिए अगर टॉयलेट से जुड़ी कोई समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

निष्कर्ष: कभी-कभार किसी मजबूरी में टॉयलेट कुछ समय के लिए रोकना आम बात हो सकती है, लेकिन इसे रोज की आदत बनाना ठीक नहीं है। शरीर द्वारा दिए जाने वाले प्राकृतिक संकेतों को समझें और लंबे समय तक उन्हें नजरअंदाज करने से बचें।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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