देश में मॉनसून का असर जारी है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसी बीच पाकिस्तान की तरफ से आने वाली अपेक्षाकृत शुष्क हवाओं को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, सिर्फ पाकिस्तान से आने वाली हवाओं को मॉनसून कमजोर होने की एकमात्र वजह बताना सही नहीं होगा। मॉनसून की स्थिति पर कई वायुमंडलीय और समुद्री कारकों का असर पड़ता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, 18 से 23 अगस्त के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के इलाकों में व्यापक बारिश की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में 19-21 अगस्त, उत्तराखंड में 20-24 अगस्त और दिल्ली-पंजाब-हरियाणा समेत कई इलाकों में भी बारिश का पूर्वानुमान है।
उत्तर-पश्चिम भारत में क्या है स्थिति?
मॉनसून की बारिश पूरे देश में एक जैसी नहीं होती। कभी बारिश की गतिविधियां कुछ इलाकों में तेज हो जाती हैं तो कहीं कुछ दिनों के लिए ब्रेक जैसी स्थिति बन जाती है। उत्तर-पश्चिम भारत में भी मॉनसून की सक्रियता मौसम प्रणालियों की स्थिति और हवा के पैटर्न के साथ बदलती रहती है।
हालांकि, मौजूदा IMD पूर्वानुमान बताता है कि आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं। इसका मतलब यह है कि अभी से सितंबर में पूरी तरह कमजोर मॉनसून की तस्वीर मान लेना उचित नहीं होगा।
क्या पाकिस्तान की हवाओं से कमजोर हुआ मॉनसून?
पाकिस्तान की ओर से आने वाली शुष्क हवा उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में नमी और स्थानीय मौसम परिस्थितियों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन मॉनसून की ताकत तय करने में मॉनसून ट्रफ, कम दबाव वाले क्षेत्र, समुद्री सतह का तापमान, ENSO जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियां और नमी का प्रवाह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए मौसम में आई कमजोरी को केवल ‘पाकिस्तान की सूखी हवा’ से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से बहुत सरल निष्कर्ष होगा।
सितंबर में कैसी होगी बारिश?
सितंबर मॉनसून का आखिरी प्रमुख महीना होता है। इस दौरान बारिश की गतिविधि धीरे-धीरे बदलने लगती है और देश के अलग-अलग हिस्सों में मॉनसून की वापसी की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
IMD के 2026 के मौसमी पूर्वानुमान में जून से सितंबर के दौरान देशभर में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई थी। मई के अपडेट में पूरे देश के लिए मौसमी बारिश का अनुमान LPA का करीब 90% रखा गया था, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना बताई गई थी।
हालांकि, यह पूरे जून-सितंबर सीजन का पूर्वानुमान है। इसे सीधे सितंबर की बारिश का सटीक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
अल नीनो भी बन सकता है अहम फैक्टर
मॉनसून के दौरान प्रशांत महासागर की स्थिति भी भारत की बारिश को प्रभावित कर सकती है। IMD के शुरुआती 2026 पूर्वानुमानों में कमजोर ला नीना जैसी स्थिति से न्यूट्रल परिस्थितियों की ओर बदलाव और बाद में अल नीनो जैसी परिस्थितियों के विकसित होने की संभावना का उल्लेख किया गया था।
यही वजह है कि मौसम वैज्ञानिक केवल किसी एक क्षेत्र की हवा को देखकर पूरे मॉनसून का आकलन नहीं करते। समुद्र और वातावरण की कई परिस्थितियों को एक साथ देखा जाता है।
अभी बारिश पूरी तरह खत्म नहीं हुई
उत्तर-पश्चिम भारत में मॉनसून कमजोर दिखने की चर्चा के बावजूद अगले कुछ दिनों के लिए IMD ने कई इलाकों में बारिश का अनुमान दिया है। दिल्ली में भी 20 से 24 अगस्त के बीच गरज-चमक और बारिश की संभावना बताई गई है।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी अलग-अलग दिनों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सितंबर?
सितंबर की बारिश खेती के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है। खरीफ फसलों के अंतिम चरण में बारिश की मात्रा और उसका वितरण फसलों की स्थिति पर असर डाल सकता है। दूसरी तरफ बहुत ज्यादा बारिश होने पर जलभराव और फसल नुकसान का खतरा भी रहता है।
इसीलिए केवल बारिश की कुल मात्रा नहीं, बल्कि बारिश कब, कहां और कितनी तीव्रता से होती है, यह भी महत्वपूर्ण है।
क्या मॉनसून की विदाई जल्द होगी?
अभी अगस्त का तीसरा सप्ताह चल रहा है, इसलिए देश के बड़े हिस्से में मॉनसून सक्रिय रहने की गुंजाइश बनी हुई है। मॉनसून की वापसी का समय हर साल मौसम की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सितंबर में मॉनसून कमजोर ही रहेगा या समय से पहले विदा हो जाएगा। आने वाले दिनों में मॉनसून ट्रफ और अन्य मौसम प्रणालियों की स्थिति इस तस्वीर को ज्यादा स्पष्ट करेगी।
निष्कर्ष: उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव जरूर है, लेकिन इसे केवल पाकिस्तान से आने वाली शुष्क हवाओं का परिणाम मानना सही नहीं होगा। IMD के ताजा पूर्वानुमान में अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम के कई हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं 2026 के पूरे मॉनसून सीजन के लिए IMD ने सामान्य से कम बारिश का अनुमान दिया है। सितंबर का वास्तविक प्रदर्शन आने वाले मौसम पैटर्न पर निर्भर करेगा।








