गांधीनगर: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं को नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि देश को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो सबसे पहले ऐसी पीढ़ी तैयार करनी होगी जो नशे जैसी बुराइयों से पूरी तरह मुक्त हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि युवा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं तो इसका असर केवल उनके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, समाज और देश की प्रगति भी प्रभावित होती है। इसलिए नशा-मुक्त समाज का निर्माण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
भूपेंद्र पटेल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें नशे के खिलाफ लगातार अभियान चला रही हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से युवाओं को जागरूक किया जा रहा है ताकि वे नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों को समझें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परिवार, शिक्षकों और समाज की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में अनुशासन, शिक्षा, खेल और सकारात्मक सोच को अपनाएं। उनका कहना था कि स्वस्थ और जागरूक युवा ही आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत की मजबूत नींव रख सकते हैं। यदि नई पीढ़ी नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाएगी, तो भारत वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति से पूरा नहीं होगा, बल्कि सामाजिक रूप से स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से नशा-मुक्त भारत के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
अपने संबोधन के अंत में भूपेंद्र पटेल ने कहा कि हर नागरिक का यह दायित्व है कि वह युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करे। उनका विश्वास है कि नशा-मुक्त, शिक्षित और सशक्त युवा ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करेंगे।








