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August 3, 2026 11:45 am

‘हवा निकल गई…’ ट्रंप के No War ऐलान पर ईरानी मीडिया का तंज, कहा- जंग की धमकियां देने वाले अब बातचीत की बात कर रहे हैं

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अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा “No War” बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले नहीं करेगा और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश करेगा। इसके बाद ईरानी मीडिया ने ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए उनका मजाक उड़ाया और कहा कि जो नेता कुछ दिन पहले तक युद्ध की धमकियां दे रहा था, वही अब बातचीत और शांति की बात कर रहा है।

ईरान के कई सरकारी और सरकार समर्थक मीडिया संस्थानों ने ट्रंप के रुख में आए बदलाव को अमेरिका की कमजोरी बताया। रिपोर्टों में कहा गया कि अमेरिका की आक्रामक नीति सफल नहीं हुई, इसलिए अब व्हाइट हाउस को कूटनीतिक रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने तंज कसते हुए लिखा कि “ट्रंप की हवा निकल गई” और अब वे युद्ध नहीं बल्कि वार्ता की अपील कर रहे हैं।

दरअसल, हाल के दिनों में ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान जल्द परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए तैयार होता है तो अमेरिका नए सैन्य हमले टाल सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वार्ता की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और दोनों पक्ष समाधान की दिशा में बढ़ सकते हैं। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर भी उम्मीद जगी कि लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है।

हालांकि ईरान की ओर से सार्वजनिक रूप से यह संदेश दिया गया कि वह दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है। ईरानी अधिकारियों और मीडिया का कहना है कि अमेरिका पहले लगातार सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देता रहा, लेकिन अब बातचीत की बात कर रहा है। इसे उन्होंने अपनी रणनीतिक बढ़त के रूप में पेश किया और दावा किया कि अमेरिकी दबाव की नीति प्रभावी साबित नहीं हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बदले हुए रुख के पीछे कई कारण हो सकते हैं। क्षेत्रीय सहयोगी देशों की चिंताएं, वैश्विक तेल बाजार पर संभावित असर, और लंबे सैन्य संघर्ष की आर्थिक लागत ऐसे प्रमुख कारक हैं, जिन्होंने अमेरिका को फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोककर कूटनीतिक विकल्पों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

अब दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता पर टिकी है। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावना बन सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद अभी भी बरकरार हैं और किसी स्थायी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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