कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक पल तब आया, जब स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डेकाथलन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में डेकाथलन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। उनकी इस शानदार सफलता ने भारतीय खेल जगत को गौरवान्वित कर दिया है।
डेकाथलन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक माना जाता है, जिसमें दो दिनों के दौरान 10 अलग-अलग ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में खिलाड़ियों की क्षमता का परीक्षण होता है। तेजस्विन शंकर ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 7,976 अंक हासिल किए और कांस्य पदक अपने नाम किया। यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक सफलता की खास बात यह रही कि तेजस्विन हाल ही में घुटने की चोट से जूझ रहे थे। चोट के कारण उन्हें हाई जंप स्पर्धा से भी हटना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मानसिक मजबूती और शानदार फिटनेस का परिचय देते हुए डेकाथलन में वापसी की और इतिहास रच दिया। उनकी इस जुझारू भावना की खेल जगत में जमकर सराहना हो रही है।
तेजस्विन शंकर पहले भी भारत के लिए कई यादगार उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। उन्होंने 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में हाई जंप में भारत का पहला पदक जीतकर इतिहास बनाया था। इसके बाद उन्होंने डेकाथलन पर अपना ध्यान केंद्रित किया और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला डेकाथलन पदक भी दिला दिया।
उनकी इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई दिग्गज नेताओं और खेल हस्तियों ने बधाई दी। सभी ने तेजस्विन के संघर्ष, समर्पण और ऐतिहासिक प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।
तेजस्विन शंकर की यह जीत न केवल भारत के लिए एक नया रिकॉर्ड है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने साबित कर दिया कि कठिन मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है।








