महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में नया राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। सत्ताधारी महायुति (भाजपा, शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट और अजित पवार गुट) के अंदर वित्त मंत्रालय को लेकर तीखी खींचतान शुरू हो गई है। अजित पवार गुट इस महत्वपूर्ण विभाग को अपने पास रखना चाहता है, जबकि शरद पवार गुट (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार) भी वित्त विभाग पर नजर गड़ाए हुए है। सूत्रों के मुताबिक, यह आंतरिक कलह महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े फेरबदल का कारण बन सकता है।
विवाद की जड़ क्या है?
महाराष्ट्र में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद महायुति ने सरकार बनाई थी। अजित पवार को उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री बनाया गया था, जो उनके गुट की मजबूत मांग थी। वित्त विभाग न केवल बजट बनाने का काम करता है, बल्कि विकास योजनाओं, फंड आवंटन और सरकारी खर्च पर पूरा नियंत्रण रखता है।
हालांकि, हाल के महीनों में शरद पवार गुट ने महायुति के कुछ नेताओं से गुप्त संपर्क बढ़ाया है। शरद पवार गुट के सूत्रों का कहना है कि वित्त विभाग उनके पास आए तो वे “किसानों, किसान आंदोलन और ग्रामीण विकास” पर ज्यादा फोकस कर सकेंगे। अजित पवार गुट इसे अपना अधिकार बताते हुए किसी भी समझौते से इनकार कर रहा है।
एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह सिर्फ मंत्रालय नहीं, बल्कि सत्ता के संतुलन का सवाल है। अगर शरद पवार गुट को वित्त मिल गया तो अजित पवार गुट की हैसियत कमजोर हो जाएगी।”
फडणवीस सरकार पर असर
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस घमासान को लेकर चिंतित हैं। भाजपा की कोशिश है कि गठबंधन टूटे नहीं, लेकिन दोनों पवार गुटों के बीच रस्साकशी उन्हें मुश्किल स्थिति में डाल रही है।
- अजित पवार गुट का तर्क: वित्त विभाग पहले से उनके पास है। किसी भी बदलाव को वे “गठबंधन तोड़ने” वाला कदम मानेंगे।
- शरद पवार गुट का दावा: वे विपक्ष में हैं, लेकिन कुछ निर्दलीय या छोटे सहयोगियों के जरिए दबाव बना रहे हैं। कुछ विधायकों के बागी होने की भी अटकलें हैं।
- शिवसेना (शिंदे गुट) मौन है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि वे भी वित्त जैसे अहम विभाग में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं।
महाराष्ट्र में बड़ा खेला संभव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह खींचतान महज मंत्रालय तक सीमित नहीं है। यह 2027 के आगामी चुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीति से जुड़ा हो सकता है। अगर महायुति टूटती है तो शरद पवार गुट कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ नई गठबंधन बनाने की कोशिश कर सकता है।
पट्टा बदलने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में विकास परियोजनाओं के फंड को लेकर भी असंतोष बढ़ रहा है।
प्रतिक्रियाएं
- अजित पवार (उपमुख्यमंत्री): “हम गठबंधन में विश्वास रखते हैं। कोई बदलाव नहीं होगा।”
- शरद पवार गुट के प्रवक्ता: “महाराष्ट्र के हित में फैसला होना चाहिए। किसानों और आम जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।”
- देवेंद्र फडणवीस: अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन बैठकें तेज हो गई हैं।
अपडेट: स्थिति लगातार बदल रही है। महायुति के शीर्ष नेताओं की आज या कल अहम बैठक संभव है। अगर समझौता नहीं हुआ तो सरकार पर संकट गहरा सकता है।
यह खबर महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में हलचल मचा रही है। पाठक बने रहें, हम इस विकास पर लगातार नजर रखे हुए हैं।








